प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे उत्तराखंड के पौराणिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक शहर जोशीमठ में लगातार भू-धंसाव बढ़ रहा है। घरों और सड़कों में आई भारी दरारें न सिर्फ लोगों को डरा रही हैं, बल्कि अब इमारतें भी गिरने लगी हैं, यहां शुक्रवार को एक मंदिर भी गिर गया है. जिससे लोगों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। बताया गया है कि सिंहधार वार्ड में मां भगवती का मंदिर ढह गया है.

हालांकि अभी तक कोई अन्य अप्रिय समाचार प्राप्त नहीं हुआ है और प्रशासन ने एहतियात के तौर पर लोगों को निकालने के लिए कई आदेश भी जारी किए हैं, लेकिन ऐसे हालात में स्थानीय निवासियों की पीड़ा और दुःख दर्द को शब्दों में बयां करना संभव नहीं है. जीवन भर की जमा-पूंजी खराब होते देख किसी की भी आंखें नम हो जाती हैं, इधर उनके घर आफत में हैं। इनमें से कई घर ऐसे हैं, जिनमें न केवल स्थानीय निवासियों का बल्कि कई दादा-दादी का जीवन भी बीता है।

आपको बता दें कि इस संवेदनशील मुद्दे पर पिछले दिनों देहरादून सचिवालय में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी. जिसकी अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जोशीमठ भू-धंसाव से डेंजर जोन में बने भवनों को तत्काल खाली करने के निर्देश दिए हैं. वहीं चमोली के जिलाधिकारी हिमांशु खुराना ने भी जोशीमठ भू-धंसाव की विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री के सचिव को भेज दी है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल 561 इमारतों में दरारें आ गई हैं। जिसमें गांधी नगर में 127, मारवाड़ी में 28, लोअर बाजार नृसिंह मंदिर में 24, सिंहधार में 52, मनोहर बाग में 69, अपर बाजार डाडों में 29, सुनील में 27, परसारी में 50, रविग्राम में 153 घर प्रभावित हैं. बता दें कि गत दिवस गढ़वाल आयुक्त सुशील कुमार व आपदा प्रबंधन सचिव रंजीत कुमार सिन्हा ने भूवैज्ञानिकों की टीम के साथ जोशीमठ में भूस्खलन को लेकर प्रभावित क्षेत्रों का गहन सर्वेक्षण भी किया था. आपात स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ की तीन और टीमें यहां तैनात की गई हैं।

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