नई दिल्ली, 31 अगस्त 2026
शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर देशभर के शिक्षकों के बीच चिंता का माहौल है। इसी मुद्दे को लेकर वर्तमान में दिल्ली प्रदेश में सक्रिय शिक्षक एवं शिक्षक प्रतिनिधि सूर्य सिंह पंवार ने सरकार से शिक्षक हित, सेवा सुरक्षा, शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के बीच संतुलन बनाते हुए न्यायपूर्ण समाधान निकालने की मांग की है।
सूर्य सिंह पंवार ने कहा कि टीईटी की अनिवार्यता केवल शिक्षकों का विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध देश की शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के भविष्य से है। शिक्षा के क्षेत्र में लिए जाने वाले किसी भी निर्णय का प्रभाव शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और पूरे समाज पर पड़ता है। इसलिए इस विषय पर जल्दबाजी के बजाय व्यापक विचार-विमर्श और संवेदनशील दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के हितों का हो संरक्षण
पंवार ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में बड़ी संख्या में शिक्षक लंबे समय से पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन शिक्षकों ने अपने अनुभव और कार्य के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि ऐसे में टीईटी से संबंधित किसी भी नए निर्णय में वर्षों से कार्यरत शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा, सम्मान, अनुभव और अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। किसी भी नीति का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना होना चाहिए, न कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को अनिश्चितता की स्थिति में डालना।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता
शिक्षक प्रतिनिधि ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना उतना ही महत्वपूर्ण है। शिक्षक पात्रता के मानकों को मजबूत रखना शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता के लिए आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सरकार के सामने दो महत्वपूर्ण पक्ष हैं। एक तरफ वर्षों से कार्यरत शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा और सम्मान है, तो दूसरी तरफ बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की जिम्मेदारी। इसलिए समाधान ऐसा होना चाहिए जो दोनों पक्षों के बीच उचित संतुलन स्थापित करे।
अंतिम निर्णय से पहले हो व्यापक संवाद
पंवार ने सरकार से मांग की कि टीईटी की अनिवार्यता को लेकर किसी भी अंतिम निर्णय से पहले शिक्षकों, शिक्षक संगठनों, शिक्षा विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ व्यापक संवाद किया जाए।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं, उनके अनुभव और वास्तविक परिस्थितियों को समझे बिना लिया गया कोई भी निर्णय व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा कर सकता है। इसलिए सरकार को संवाद, संवेदनशीलता और दूरदर्शिता के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
टीईटी की मूल भावना और विश्वसनीयता बनी रहे
शिक्षक समुदाय का मानना है कि टीईटी का मूल उद्देश्य शिक्षक पात्रता और शिक्षा के मानकों को सुनिश्चित करना है। इसलिए परीक्षा की मूल भावना और उसकी विश्वसनीयता बनी रहनी चाहिए।
हालांकि, लंबे समय से कार्यरत अनुभवी शिक्षकों की सेवा अवधि और उनके योगदान को भी उचित महत्व दिया जाना आवश्यक है। पंवार ने कहा कि ऐसा रास्ता तलाशना होगा, जिसमें शिक्षक पात्रता के मानक भी मजबूत रहें और अनुभवी शिक्षकों के साथ न्याय भी हो।
बच्चों के भविष्य को मिले सर्वोच्च प्राथमिकता
उन्होंने कहा कि इस पूरे विषय के केंद्र में बच्चों का भविष्य होना चाहिए। किसी भी नीति या न्यायिक व्यवस्था के प्रभाव का आकलन करते समय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो।
उन्होंने सरकार के समक्ष प्रमुख रूप से निम्न मांगें रखीं—
- वर्षों से कार्यरत शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
- अनुभवी शिक्षकों के योगदान और अनुभव को उचित महत्व दिया जाए।
- शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षक पात्रता के मानकों को मजबूत रखा जाए।
- बच्चों के शिक्षा के अधिकार और उज्ज्वल भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
- टीईटी से जुड़े निर्णयों से पहले शिक्षक संगठनों और संबंधित पक्षों से संवाद किया जाए।
- किसी भी निर्णय का ऐसा प्रभाव न हो जिससे अनुभवी शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था में अनावश्यक अस्थिरता पैदा हो।
दिल्ली प्रदेश से उठी शिक्षक हितों की आवाज
वर्तमान में दिल्ली प्रदेश से शिक्षक हितों की आवाज उठाने वाले सूर्य सिंह पंवार ने कहा कि शिक्षकों की एकजुटता यह दर्शाती है कि शिक्षक समाज अपने अधिकारों, सम्मान और भविष्य को लेकर सजग है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की मांग किसी व्यवस्था को कमजोर करने की नहीं, बल्कि ऐसी न्यायपूर्ण और संतुलित व्यवस्था बनाने की है जिसमें शिक्षक और विद्यार्थी दोनों के हित सुरक्षित रहें।
उन्होंने सरकार से अपील की कि इस गंभीर विषय को केवल एक परीक्षा या पात्रता के मुद्दे के रूप में न देखा जाए, बल्कि इसे शिक्षक हित, शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों के भविष्य से जोड़कर व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाए।
उन्होंने कहा कि सरकार यदि सभी पक्षों को साथ लेकर संवेदनशीलता और दूरदर्शिता के साथ निर्णय लेती है, तो इस विवाद का ऐसा समाधान निकाला जा सकता है जो शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा करने के साथ-साथ देश की शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूत बनाए।
“शिक्षकों का सम्मान और अधिकार सुरक्षित रहें, शिक्षा की गुणवत्ता मजबूत बने और बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो—इसी संतुलन में इस मुद्दे का न्यायपूर्ण समाधान संभव है।”

