देहरादून: रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम को दर्शाता है. साल भर भाई-बहन इस त्योहार का बेसब्री से इंतजार करते हैं। लेकिन इस त्योहार को खास बनाना हर बहन का सपना होता है.
इस सपने को साकार करने के लिए देहरादून में एक समाजसेवी संस्था लगी हुई है। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर महिलाओं ने देश की सीमा पर पहरा देने वाले जवानों के लिए हर घर तिरंगा अभियान के तहत तिरंगे की थीम पर अनाज से बनी राखियां भेजी हैं.

देहरादून में आजीविका ज्ञान वाटिका समाज सेवा संगठन में कार्यरत महिलाओं और लड़कियों ने मिलकर इस रक्षाबंधन पर देश की सीमा की रक्षा करने वाले वीर जवानों को राखी भेजी है। जिसके लिए समाज सेवा संगठन की महिलाएं पिछले कई दिनों से लगातार राखी तैयार करने में लगी हुई हैं. वहीं इन महिलाओं की ओर से सैनिकों को 2500 से ज्यादा राखियां भेजी जा चुकी हैं.
देश की सरहद पर देश की सुरक्षा में लगे वीर जवानों को राखी भेजने वाली इन महिलाओं ने भी इस बार राखी बनाने का अनोखा अंदाज अपनाया है. राखी बनाने वाली महिलाओं ने बताया कि स्वतंत्रता के अमृत उत्सव के तहत उनके द्वारा किए जा रहे ‘हर हर तिरंगे’ अभियान के चलते इस बार तिरंगे की थीम पर राखी बनाई जा रही है. जिसमें केसरिया सफेद और हरे रंग के उत्पादों से राखी बनाई जा रही है।
आजीविका ज्ञान वाटिका प्रशिक्षण संस्थान की प्राचार्य नीलम विजय ने बताया कि उनके द्वारा तैयार की जा रही ये राखियां जवानों को भेजी जा रही हैं. ये राखियां कई ऐसी महिलाओं ने भी बनाई हैं जिनके अपने भाई नहीं हैं और वे देश के सिपाही को अपना भाई मानती हैं. वहीं देश की सीमा की रखवाली कर रहे सिपाही को बहन का भाव देते हुए ये राखियां उन्हें ऐसा अहसास कराएंगी कि उनकी किसी बहन ने उन्हें रक्षाबंधन पर राखी भेजी है.
रक्षाबंधन के मौके पर तिरंगा अभियान के तहत महिलाओं द्वारा जय जवान जय किसान का नारा तैयार किया जा रहा है. . महिलाओं द्वारा आसपास में उपलब्ध स्थानीय अनाज के साथ पर्यावरण के अनुकूल राखियां भी बनाई जा रही हैं। महिलाओं का कहना है कि जहां एक तरफ पूरा देश आजादी का अमृत पर्व मना रहा है और हर घर तिरंगा अभियान की मुहिम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाई जा रही हैं.
इसी कड़ी में महिलाएं तिरंगे की थीम में स्थानीय अनाज से राखियां भी बना रही हैं. डिजाइन तैयार करने वाली जिज्ञासा पांडे ने कहा कि ये राखियां सभी महिलाओं द्वारा केसर, सफेद और हरे रंग के उत्पादों का उपयोग करके बनाई जा रही हैं जो सीधे तौर पर किसानों को भी एक बड़ा संदेश देती हैं। जिस तरह से जय जवान जय किसान के नारे को को पूरा करता है।
25 साल से चल रहा है अभियान : इस पूरे कार्यक्रम का समन्वय कर रहे आचार्य विपिन जोशी ने बताया कि देहरादून की बहनों द्वारा हर साल विभिन्न संगठन के सहयोग से सीमा पर देश की रक्षा करने वाले जवानों के लिए हर साल राखी भेजी जाती है । उन्होंने बताया कि उनके द्वारा कई बार बाघा सीमा पर जवानों के बीच जाकर जवानों की कलाई में बहनों की राखी बांधी गई थी.

