देहरादून : बीज यदि स्वयं न खिल पाए तो वह अपने को सड़ा- गला कर दूसरे के लिए खाद बन जाता है।यही बात अमर शहीद श्रीदेव सुमन ने किया । सामंतशाही के लिए मृत सुमन जीवित सुमन से ज्यादा खतरनाक साबित हुआ । यह बात आज महापौर सुनील उनियाल गामा ने श्रीदेव सुमन की पुण्यतिथि पर टिहरी नगर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम के अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि श्री देव सुमन हमारे आदर्श हैं और हम सब को उनके आदर्शों पर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि 1930 में जब नमक आंदोलन पूरे देश में चल रहा था श्री देव सुमन भी उस आंदोलन का एक हिस्सा बने और उन्हें जेल जाना पड़ा।

नाबालिक होने के कारण 14 दिन जेल में रहने के उपरांत उन्हें दो चार बेंत मार कर छोड़ दिया गया। 1942 में भी भारत छोड़ो आंदोलन में श्री देव सुमन को आगरा सेंट्रल जेल में जाना पड़ा । उसके बाद टिहरी में राजशाही द्वारा जनता के साथ किए जा रहे अत्याचारों पर उन्होंने पुरजोर विरोध किया। जिसके कारण उनको टिहरी जेल में 35 सेर की जंजीर में बांधकर रखा गया । उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया जिसके कारण उनको टिहरी जेल में 84 दिन भूख हड़ताल की उन्होंने आज ही के दिन 1944 में अपनी शहादत दी । उनकी हत्या कर दी गई थी। इस अवसर पर पहाड़ी प्रजा मंडल के अध्यक्ष और समाजसेवी बीर सिंह पंवार ने कहा कि हमारा इतिहास गौरवशाली है यह देवभूमि शहीदों क्रांतिकारियों की जननी है

सरकार को ऐसे महान विभूतियों को स्कूल के पाठ्यक्रम में रखना चाहिए । उनके संघर्ष भरे जीवन को नई पीढ़ी को रूबरू कराना चाहिए। इस संदर्भ में पहाड़ी प्रजामंडल शीघ्र ही मुख्यमंत्री से मिलेगा। इस अवसर पर गिरिराज उनियाल ने श्री देव सुमन को याद करते हुए विस्तार से उनके बारे में बताया । विधायक विनोद चमोली ने श्रीदेव सुमन को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी प्रतिमा लगाने का काम शुरू करवाया। जो इस हफ्ते पुरा हो‌ जाएगा । इस अवसर पर भाजपा महानगर के मीडिया प्रभारी राजीव उनियाल, टिहरी विस्थापित समिति के पदाधिकारी , गिरीश पैनुली ,गणेश उनियाल , विनोद रावत‌, राजेंद्र असवाल मुन्नी नौटियाल, सरिता भट्ट , उर्मिला पंत , राजेंद्र चौहान , आदि मौजूद रहे ।

दिल्ली मंकीपॉक्स : दिल्ली में पहला मंकीपॉक्स का मामला लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल में दो दिन तक भर्ती रहा।