देहरादून: उत्तराखंड की वन भूमि पर अतिक्रमण के मामले अब विभाग के निशाने पर हैं. दरअसल इस मामले पर कोर्ट ने आदेश भी दे दिया है. लेकिन अब वन विभाग अतिक्रमण स्थलों की पहचान करने में सफल हो गया है। हैरानी की बात यह है कि वन विभाग की निगरानी करने वाले विभाग के अधिकारियों को भी नहीं पता कि ये निर्माण कब और कैसे किए गए।
देहरादून संभाग में धार्मिक स्थलों पर वन विभाग की कार्रवाई इन दिनों चर्चाओं में है। दरअसल, दून मंडल में अवैध रूप से बने कुल 17 मजारों को चिन्हित किया गया है. इसमें से 15 मजारों खुदी हुई हैं। मजे की बात यह है कि वन भूमि में कब ये अतिक्रमण हो गया, वन विभाग के अधिकारियों को पता तक नहीं चला।
बता दें कि प्रदेश में वन भूमि पर 200 से अधिक धार्मिक स्थलों का चयन किया जा चुका है। हालांकि कोर्ट पहले ही ऐसे अतिक्रमण निर्माणों को गिराने का आदेश दे चुका है। लेकिन वन विभाग को पता ही नहीं चला कि कब उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाली ऐसी वन भूमि पर अतिक्रमण हो गया। इसलिए पिछले कई महीनों से ऐसी जमीन को चिह्नित करने का काम लगातार चल रहा था। इसके बाद देहरादून संभाग से 15 मजारों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
वन विभाग की इस कार्रवाई को लेकर वन मंत्री सुबोध उनियाल का कहना है कि इस कार्रवाई का किसी धर्म विशेष से कोई लेना-देना नहीं है. उनकी ओर से अधिकारियों को सीधे निर्देश दिए गए हैं कि जितने भी अतिक्रमण हुए हैं, चाहे वे कोई भी हों, उन्हें तोड़ा जाए। अगर किसी तरह की लापरवाही की जाती है तो अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

