हल्द्वानी : कुमाऊं के अलग-अलग इलाकों में पिछले 48 घंटे से हो रही लगातार बारिश लोगों के लिए आपदा बन गई है. भूस्खलन के बाद सड़कों पर मलबा आने से कुमाऊं की करीब 55 सड़कें बंद हैं. पिथौरागढ़ जिले में 48 घंटे से रुक-रुक कर हो रही बारिश से सरकारी और निजी संपत्ति को भी भारी नुकसान हुआ है. धारचूला इलाके में आधा दर्जन रिहायशी इमारतों को नुकसान पहुंचा है. कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने सभी जिलों के डीएम को सड़कें खोलकर आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने के निर्देश दिए हैं.
अपर आयुक्त जीवन सिंह नगन्याल ने बताया कि नैनीताल जिले में 14 सड़कें बंद हैं, जबकि अल्मोड़ा में 5, पिथौरागढ़ में 16, बागेश्वर में 13 और चंपावत जिले में 49 ग्रामीण सड़कें, 3 सीमा सड़कें बंद हैं. इसके अलावा सबसे ज्यादा नुकसान पिथौरागढ़ जिले के धारचूला में हुआ है. जहां पेयजल और बिजली की लाइनें भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं, वहीं डीडीहाट में बिजली विभाग का 25 केवी का ट्रांसफार्मर भी वज्रपात के चलते क्षतिग्रस्त हो गया है.
भूस्खलन से सबसे ज्यादा नुकसान नैनीताल जिले को हुआ है, जहां नैनीताल-भवाली राज्य मार्ग पर मलबा आने से सड़क पूरी तरह से अवरुद्ध हो गई है, जिसे खुलने में 10 दिन से ज्यादा का समय लग सकता है. कुमाऊं आयुक्त ने अधिकारियों को इस मार्ग को खोलने का निर्देश दिया है.
जबकि अन्य मार्गों को खोलने के लिए रविवार को भी युद्धस्तर पर काम शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा सरकारी-निजी संपत्ति का नुकसान पिथौरागढ़ और नैनीताल जिलों में हुआ है, जिसका आकलन किया जा रहा है, जिसके लिए राजस्व विभाग की टीमों को तैनात किया गया है.

