उत्तराखंड हाईकोर्ट में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा किया गया डैथ ऑडिट पूर्णतः अस्पष्ट और भ्रमित करने वाला है क्योंकि अधिकांश मृत्यु हृदय गति रुकने से बताई गई हैं। दूसरी लहर में कितने लोगों की मौत कोविड-19 के कारण हुई, नहीं बताया गया और पूरे शपथ पत्र में स्वास्थ्य सचिव द्वारा तर्कहीन तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं। साथ ही कोर्ट ने कहा कि मृत्यु के ऑडिट करते समय कोर्ट के पूर्व आदेश का उल्लंघन करते हुए राज्य सरकार ने निकायों द्वारा जारी किए गए मृत्यु प्रमाण पत्रों के सापेक्ष मृत्यु की गणना नहीं की गयी है। इसलिए राज्य सरकार द्वारा कराए गए डैथ ऑडिट की सत्यता को कोर्ट द्वारा स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव से निम्न बिंदुओं पर विस्तृत शपथ पत्र पेश करने को कहा है : –
1 – प्रदेश में कुल कितने गाँव सड़क से नहीं जुड़े हैं। इन गांवों का निकटस्थ रोड हेड कितनी दूर है।
2 – स्वास्थ्य विभाग के पास कुल कितनी एंबुलेंस हैं। 108 सेवा के पास कितनी एंबुलेंस है। यह सभी एंबुलेंस कहां-कहां तैनात की गई हैं। कितनी एंबुलेंस संचालन में हैं और कितनी बेकार पड़ी हैं।
3 – तीसरी लहर के लिए बाल रोग विशेषज्ञों की जो हाई पावर कमेटी बनाई गई थी और उसने अपनी रिपोर्ट में जो संस्तुतियां दी हैं उनके अनुपालन का क्या स्टेटस है। प्रदेश में बच्चों के लिए कुल कितने वार्ड कितने अस्पतालों में हैं और उन में कितने पीडियाट्रिक बैड हैं।
4 – प्रदेश में कौन से ऐसे सरकारी अस्पताल हैं जिनमें अब तक बच्चों के वार्ड नहीं हैं। प्रदेश में सरकारी अस्पतालों में कुल कितने एनआईसीयू है।
5 – ग्राम स्तर पर स्थित पीएचसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पूरे प्रदेश में कितने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर सिलेंडर आदि की सुविधा है और किनमें नहीं है।
6 -रामनगर में पूर्व में कोर्ट के आदेशों से एक छोटा निजी अस्पताल कोविड-19 अस्पताल बनाया गया था परंतु तीसरी लहर के लिए रामनगर में कोविड-19 के अस्पताल की क्या तैयारियां की गई हैं और सरकार रामनगर में तीसरी लहर के लिए कोविड-19 के अलग बड़े अस्पताल की स्थापना के लिए कितनी तैयार है।
7 – पौड़ी में स्थित लवाली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं की बहाली और पानी का कनेक्शन लगाया जाए।
8 – तीसरी लहर के लिए यदि डॉक्टरों की कमी पड़ती है तो सुरक्षा बल सेना आदि के चिकित्सकों की सेवा लेने पर भी सरकार अभी से तैयारी करें। 28 तारीख को मुख्य सचिव और अपर सचिव पर्यटन आशीष चौहान कोर्ट में उपस्थित होकर बताएंगे कि चार धाम यात्रा के संबंध में राज्य कैबिनेट ने भविष्य के लिए क्या निर्णय लिया है।
मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने 7 जुलाई की तिथि नियत की है।
प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं से नाखुश हाईकोर्ट

