जौनसार-बावर : हनोल महासू देवता मंदिर के गर्भ गृह में केक काटकर जन्मदिन मनाया गया है जन्मदिन पर केक काटना भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं हो सकता है । मोमबत्तियां जलाकर जन्मदिन मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। इसमें दीप जलाकर जन्मदिन की बधाई दी जाती है। आज पश्चिमी देश भारत की संस्कृति, सभ्यता का अनुसरण कर रहे हैं लेकिन हम पश्चिमी संस्कृति में रंगे जा रहे हैं। पश्चिमी देश की संस्कृति से देश बर्बाद हो रहा है।

जिस तरह केक को टुकड़ों में काटकर जन्मदिन पर बांटा जाता है, वह पश्चिमी देशों में किया जाता है। बूंदी के लड्डू भारतीय संस्कृति में बनाए जाते थे। सबका मुंह मीठा कर आशीर्वाद लिया जाता था । यही हममें और पाश्चात्य संस्कृति में अंतर है। जहां पाश्चात्य संस्कृति बांटने का काम करती है, वहीं भारतीय संस्कृति सबको एक होकर जीने का संदेश देती है।

यह स्थान हनोल स्थित महासू देवता मंदिर के अंदर चांदी की पौड का है जहां पश्चिम सभ्यता के अनुसार केक काटकर जन्मदिन मनाया गया है। यह वही स्थान है जहां से हजारों, लाखों लोग देवता से अपनी मन्नतें मांगने के लिए माथा टेकते हैं।

दुर्भाग्य का विषय है कि जो लोग यहां सदियों से पैतृक निवास करते हैं ऐसे लोगों को हम जातिवाद के नाम पर मंदिर में प्रवेश के लिए तरह-तरह के अवरोध पैदा करते हैं और जो लोग बाहर से आते हैं वह जन्मदिन का केक काट कर चले जाते हैं और पुजारी जी पश्चिमी सभ्यता की इस परंपरा को भारतीय रीति के अनुसार आशीर्वाद देकर विदा करते हैं।

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यदि इसे तुरंत रोका नहीं गया तो भविष्य में जन्मदिन के साथ साथ क्या-क्या नृत्य और कृत्य होंगे उसकी कल्पना करना सहज है । हनोल स्थित महासू देवता मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है इसके साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा ।

इसको लेकर लोगों में भारी रोष है और वो सोशल मीडिया के जरिये इसका विरोध कर रहे है