मसूरी , पहाड़ न्यूज़ टीम
भू-माफियाओं द्वारा बड़ी मशीनों से कटान करके धडल्ले से अवैध निर्माण मसूरी की तलहटी में किया जा रहा है, लेकिन वन विभाग व जिला प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है. जानकारी के अनुसार राजपुर क्षेत्र के कैरवान गांव में बाहरी भू माफियाओं द्वारा पहाड़ों का लगातार दोहन किया जा रहा है. पहाड़ों का सीना फाड़ने वाले इन भू-माफियाओं और सफेदपोशों की सांठगांठ के खिलाफ कार्रवाई करने से भी विभाग कतरा रहा है, जिससे पर्यावरणविद और प्रकृति प्रेमी खासे नाराज हैं.
दरअसल, मसूरी की तलहटी में भू-माफिया लगातार बड़े-बड़े पहाड़ काट रहे हैं और प्लाटिंग की जा रही हैं, जिसकी जद में दर्जनों संरक्षित पेड़ भी आ गए हैं, लेकिन वन विभाग या खनन विभाग अब तक खामोश है. मामला राजपुर क्षेत्र के कैरवान गांव का है, जहां बाहरी भू-माफिया लगातार पहाड़ों का सीना फाड़कर अवैध प्लाटिंग व निर्माण कर रहे हैं. वहीं विभाग के अधिकारी भी इन भूमाफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं. इससे स्पष्ट है कि राज्य के कई सफेदपोश भी इस खेल में शामिल हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रकृति प्रेमी रेनू पाल ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि उनके द्वारा संबंधित विभागों में शिकायत की गई है और इसके लिए उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है, जिस पर कोर्ट ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने बताया है कि विकास नगर से रानीपोखरी तक के इलाके को चिह्नित कर लिया गया है. नियमानुसार 30 डिग्री से अधिक के ढलान पर काट कर निर्माण नहीं किया जा सकता है। साथ ही रिस्पना के उद्गम क्षेत्र में 100 मीटर के दायरे में किसी भी तरह का निर्माण नहीं हो सकता है, लेकिन भू-माफिया लगातार नियमों को ताक पर रखकर क्षेत्र में अंधाधुंध निर्माण कर रहे हैं और स्थानीय प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है.
रेनू पाल ने बताया कि यह क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से भी काफी संवेदनशील है और मसूरी की तलहटी पर हो रहे कटान से बरसात के समय यहाँ कई भूस्खलन के क्षेत्र बन जाते हैं, जिससे जान-माल का नुकसान हो सकता है . सरकारी जमीन पर भी कब्जा किया जा रहा है, जो सरकार की कमी को दर्शाता है। आलम यह है कि जब आम आदमी की बात नहीं सुनी जाती है तो उसे कोर्ट की शरण लेनी पड़ती है. ऐसे निर्माण कार्यों पर हाईकोर्ट ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है।
इस संबंध में मसूरी वन प्रभाग के डीएफओ कहकशां नसीम ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में है. सेटेलाइट से उसकी लगातार निगरानी की जा रही है। वहीं, वन विभाग की टीम भी मौके पर भेजी जा रही है। अगर जंगलों को नुकसान होता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

