टिहरी , PAHAAD NEWS TEAM

देवताओं के देवता कोणेश्वर महादेव की पालकी का ग्रामीणों ने बड़े उत्साह से स्वागत किया और पालकी के दर्शन कर पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की.

बैसाखी के प्रारंभ से ही अपने-अपने कुलों की पालकी जौनपुर विकासखंड के अधिकांश क्षेत्रों में आने लगी है, कहीं नाग देवता और ऋषिकेश देवता की पालकी का थौल मेला मनाने की पौराणिक प्रथा है. इसी मान्यता में देवताओं के देवता कोणेश्वर महादेव की पालकी पौराणिक स्थल देवलसारी से ग्राम ठिक्क, तेवा, होते हुये अपने मूल गांव बंगसील पहुंची, जहां ग्रामीणों ने पालकी का भव्य स्वागत किया. दोपहर में मुख्य पुजारी विजय गौड़ ने सभी ग्रामीणों की उपस्थिति में विभिन्न व्यंजनों का भोग लगाकर पूजा अर्चना की और उसके बाद मंदिर के गर्भगृह से भगवान महादेव की पालकी को वाद्य यंत्रों की थाप पर दर्शन के लिए मनाण चौक लाया गया. ग्रामीणों ने कोणेश्वर महादेव की पालकी को प्रणाम किया और सिर झुकाकर आशीर्वाद लिया। दिन भर गांव के लम्बरदार, सयाणा गोबिंद सिंह राणा, पूर्ब प्रधान गुड्डी देवी ,प्रेम सिंह, गजे सिंह, मिजान सिंह, दिलमणी, घनश्याम गौड़, चंद्रर सिंह रावत, सूर्यमणी गौड़, शुरबीर सिंह, जगमोहन, सरत सिंह पंवार, जगत सिंह, महिपाल आदि ग्रामीणों ने बताया कि जौनपुर विकास खंड के भीतर बंगसील देवलसारी मंदिर एकमात्र मंदिर है जहां देवताओं के देवता महादेव की पूजा की जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि पौराणिक विधाओं के अनुसार क्षेत्र में भगवान के कई अन्य रूपों की पूजा की जाती है, लेकिन बंगसील देवलसारी स्थित मंदिर में शिव के दर्शन होते हैं। साल में दो बार, भगवान कोणेश्वर महादेव की पालकी को गर्भगृह से दर्शन के लिए बाहर निकाली जाती है।