काशीपुर, PAHAAD NEWS TEAM

महालक्ष्मी (समृद्धि) की पूजा में गन्ने का विशेष महत्व है। राज्य में गन्ने को किसानों की समृद्धि (दोहरी आय) का केंद्र बनाने के लिए सरकार विशेष प्रयास करने जा रही है. समृद्धि का यह उर्वरक किसानों के सुख-समृद्धि में वृद्धि करना निश्चित है।

यह समृद्धि जैविक गन्ने की खेती में छिपी है। उत्तराखंड गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग और उत्तराखंड गन्ना किसान संस्थान और प्रशिक्षण केंद्र इन दिनों इसे साकार करने की दिशा में काम कर रहे हैं। उत्तराखंड गन्ना किसान संस्थान एवं प्रशिक्षण केंद्र ने किसानों को गन्ने की जैविक खेती का प्रशिक्षण देने की तैयारी कर ली है। यह प्रशिक्षण प्रदेश के प्रत्येक चीनी मिल क्षेत्र के जैविक खेती में रुचि रखने वालों को कृषि वैज्ञानिक देंगे। प्रशिक्षण केंद्र ने इसके लिए किसानों का एक वाट्सएप ग्रुप भी बनाया है, जिस पर जैविक गन्ना उत्पादन की जानकारी दी जाएगी। इससे किसान खुद जैविक खाद तैयार कर गन्ने की अच्छी फसल पैदा कर सकेंगे। उत्तराखंड गन्ना किसान संस्थान एवं प्रशिक्षण केंद्र के संयुक्त निदेशक नीलेश कुमार के नेतृत्व में जल्द ही प्रशिक्षण शुरू होगा। संयुक्त निदेशक ने कहा कि राज्य में पंजीकृत लगभग दो लाख गन्ना किसानों को इसका लाभ मिलेगा. इन किसानों को बीजामृत, जीवामृत, प्राकृतिक खाद और जैव कीटनाशक तैयार करने के साथ-साथ खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

बचत होगी किसानों की

जैविक खेती करने से किसान यूरिया, डाई, पोटास और अन्य रासायनिक खाद खरीदने से बचेंगे। इससे गन्ने की बुवाई की लागत कम होगी और बेहतर फसल से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

जैविक खेती के लाभ

जैविक खेती से भूमि की उर्वरता बढ़ेगी और ङ्क्षसचाई अंतराल में वृद्धि होगी । फसलों की उत्पादकता भी बढ़ेगी। किसानों को गन्ने का बेहतर दाम मिलेगा।

जैविक खाद बनाने की विधि

संयुक्त निदेशक नीलेश कुमार ने बताया कि देसी गाय का गोबर 10 किग्रा , पांच लीटर देसी गोमूत्र, दो किग्रा गुड़ व बेसन, 200 ग्राम बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी और 180 लीटर पानी एक सीमेंट के बर्तन में मिलाकर 48 घंटे तक रखने से जैव कीटनाशक तैयार हो जाता है । यह खाद कई कीड़ों को नष्ट करने में सक्षम है।