नैनीताल , PAHAAD NEWS TEAM

टिहरी बांध प्रभावितों के पुनर्वास करने और बांध की परियोजना में निर्धारित क्षमता के अनुसार बिजली पैदा करने के मुद्दे पर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने बुधवार को सुनवाई की. कोर्ट ने पुनर्वास मामले के सवाल को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है, जबकि जस्टिस आलोक वर्मा ने इस मामले में सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है. अब चीफ जस्टिस नई बेंच का गठन करेंगे।

बुधवार को मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की पीठ ने अधिवक्ता अभिनव थापर द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई की। इसमें टिहरी बांध के विस्थापितों को मुआवजा व पुनर्वास करने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा कि टिहरी बांध को बने 14 साल हो चुके हैं, तब से लगातार बांध से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, इसलिए प्रभावितों को नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए. यह भी कहा कि परियोजना के अनुसार बांध से 2400 मेगावाट बिजली पैदा होनी चाहिए, लेकिन 1400 मेगावाट ही पैदा हो रही है.

अधिवक्ता अभिनव थापा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि टिहरी बांध प्रभावितों का पुनर्वास करने और बांध में प्रोजेक्ट निर्धारित क्षमता के अनुरूप बिजली उत्पादन करने के मामले में विस्थापितों को मुआवजा दिया जाए।