देहरादून, पहाड़ न्यूज टीम
उत्तराखंड में मंकी पॉक्स को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी किया है. स्वास्थ्य निदेशालय ने मंकी पॉक्स को लेकर राज्य के उच्च स्वास्थ्य अधिकारियों और जिलाधिकारियों को अलर्ट जारी किया है. एडवाइजरी में कहा गया है कि बुखार और शरीर पर चकत्ते वाले मरीजों की सूचना तत्काल मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में दें. मंकीपॉक्स वायरस से होने वाली बीमारियों के मामले बढ़ते जा रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) लगातार दुनिया भर के देशों को इससे बचाव के लिए चेतावनी देता रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंकीपॉक्स से दुनिया के 23 देशों के 257 लोग बीमार हो चुके हैं. चिंता की बात यह है कि इस बीमारी के लक्षण चेचक के समान ही होते हैं। इसके अलावा बुखार, सिरदर्द होना आम बात है। इसलिए कई बार लोगों को इसके बारे में देर से पता चलता है। इसलिए दुनियाभर के डॉक्टर इसके बारे में लोगों को आगाह कर रहे हैं.
मंकीपॉक्स के लक्षण और बचाव
मंकी पॉक्स का वायरस त्वचा, आंख, नाक या मुंह के जरिए शरीर में प्रवेश करता है।
शरीर में चकत्ते पड़ जाते हैं और शरीर में छाले निकल आते हैं। ये लक्षण दो से चार सप्ताह तक चलते हैं।
यह किसी संक्रमित जानवर के काटने या उसके खून, शरीर के तरल पदार्थ या उसे छूने से भी हो सकता है।
मंकी पॉक्स संक्रमित जानवर का मांस खाने से भी हो सकता है।
कहां से आया मंकीपॉक्स वायरस: आपको बता दें कि मंकीपॉक्स वायरस का अपने नाम के अनुसार बंदरों से कोई लेना-देना नहीं है। मनुष्यों में इस वायरस का पहला मामला 1970 में मध्य अफ्रीकी देश कांगो में पाया गया था। इसके मामले 2003 में संयुक्त राज्य अमेरिका में सामने आए थे। इसके पीछे का कारण घाना से आयातित चूहों को दिया गया था, जो पालतू जानवरों की एक दुकान से बेचे गए थे। 2022 में यूनाइटेड किंगडम में मई के महीने में इसका पहला मामला सामने आया था। तब से यह वायरस यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में फैल चुका है। फिलहाल भारत में मंकीपॉक्स का कोई मामला सामने नहीं आया है।

