देहरादून , पहाड़ न्यूज टीम

गांधी पार्क में धरने पर बैठे युवक सुरेंद्र सिंह रावत उत्तराखंड में सख्त जमीन कानून की मांग को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़ गए हैं. युवक के टावर पर चढ़ने की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंच गई है। युवक को नीचे उतारने का प्रयास किया जा रहा है। भूमि कानून की मांग पूरी नहीं होने पर युवक आत्महत्या करने की धमकी दे रहा है।

उत्तराखंड भूमि कानून को मजबूत करने की मांग को लेकर देहरादून के गांधी पार्क में 15 दिनों से धरने पर बैठे क्रांतिकारी सुरेंद्र सिंह रावत आज सुबह पटेल नगर के मोबाइल टावर पर चढ़ गए. भूमि कानून की मांग पूरी नहीं होने पर उन्होंने आत्महत्या करने की धमकी दी। सुरेंद्र ने एक वीडियो जारी कर कहा है कि अगर वह आत्महत्या करते हैं तो इसकी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की होगी। मामले की सूचना पर पटेल नगर कोतवाली पुलिस तत्काल मौके पर पहुंच गई है.

फिलहाल पुलिस युवक को टावर से निकालने का प्रयास कर रही है। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी युवक को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। युवक ने मोबाइल टावर पर चढ़कर वीडियो बनाया जो अब वायरल हो रहा है.

राज्य के गठन से है सख्त भूमि कानून की मांग : उत्तराखंड के लिए भूमि कानून कोई नया मुद्दा नहीं है। राज्य की स्थापना के बाद भूमि कानून की मांग उठने लगी। उस दौरान राज्य में उत्तर प्रदेश का भूमि अधिनियम लागू रहा। राज्य बनने के बाद जमीन की खरीद-फरोख्त बहुत तेजी से शुरू हुई। इसे देखते हुए भूमि कानून को लेकर एनडी तिवारी सरकार में कुछ संशोधन किए गए। उत्तराखंड दो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़ा हुआ है। यहां 71 प्रतिशत वनों के साथ 13.92 प्रतिशत मैदानी क्षेत्र है, जबकि 86% पर्वतीय क्षेत्र है।

एनडी तिवारी सरकार ने वर्ष 2003 में उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि व्यवस्था सुधार अधिनियम 1950 की धारा 154 में संशोधन किया। इसमें राज्य के बाहर के लोगों को आवासीय उपयोग के लिए 500 वर्ग मीटर जमीन खरीदने की अनुमति देने का नियम तय किया गया था। इतना ही नहीं कृषि भूमि की खरीद पर सशर्त रोक लगा दी गई थी।

वहीं जिलाधिकारी को 12.5 एकड़ तक की कृषि भूमि की खरीद की अनुमति देने का अधिकार दिया गया. उद्योगों की दृष्टि से शासन से अनुमति लेकर भूमि क्रय करने की व्यवस्था की गयी। इतना ही नहीं जिस प्रोजेक्ट के लिए जमीन ली गई है उसे पूरा करने की शर्त भी 2 साल में रखी गई है। हालांकि बाद में इसमें कुछ ढील दी गई थी।
इसके बाद भी भूमि कानून का मामला शांत नहीं हुआ और राज्य में राज्य के बाहर के लोगों द्वारा बड़ी मात्रा में जमीन खरीदने का मामला भी राजनीति में देखने को मिला. इसलिए खंडूरी सरकार ने 500 वर्ग मीटर की अनुमति को घटाकर 250 वर्ग मीटर करते हुए नियमों में कुछ और सख्ती की. हालांकि त्रिवेंद्र सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए साल 2018 में खंडूरी सरकार के इस नियम को खत्म कर दिया था. जिसके बाद बाहर से आने वाले लोगों को राज्य में जमीन खरीदने की पूरी आजादी मिली.