विकासनगर, PAHAAD NEWS TEAM
टिहरी के जौनपुर , उत्तरकाशी जिले के रंवाई,बंगाण क्षेत्र और जौनसार बावर जिले में बैसाखी से शुरू हो रहे चार दिवसीय बिस्सू उत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं. घर में साफ-सफाई के साथ ही महिलाओं ने पारंपरिक व्यंजन बनाना शुरू कर दिया है। शहरवासियों को इस त्योहार का बेसब्री से इंतजार है टिहरी के जौनपुर , उत्तरकाशी जिले के रंवाई,बंगाण क्षेत्र और जौनसार बावर जिले में बैसाखी के दिन से बिस्सू पर्व की शुरुआत होगी. आदिवासी क्षेत्र के लिए बिस्सू उत्सव का विशेष महत्व है। इस त्योहार से क्षेत्र के लोगों की पौराणिक मान्यता और आस्था भी जुड़ी हुई है। इससे टिहरी के जौनपुर , उत्तरकाशी जिले के रंवाई,बंगाण क्षेत्र और जौनसार बावर जिले के हर घर में रंगाई पुताई व साफ सफाई का काम जोरों पर है. त्योहार में बुरांस के फूलों का भी महत्व है। बैसाखी के दिन हर गांव के ग्रामीण सुबह जल्दी उठकर जंगल से फूलों का गुलदस्ता लेकर आते हैं। पंचायती प्रांगणों और देव मंदिरों में इन्हें चढ़ाकर घरों में सजाया जाता है। लोग फूल चढ़ाकर देवता की पूजा करते हैं। इसके साथ ही क्षेत्र में चार दिवसीय उत्सव भी शुरू हो जाता है। त्योहार पर गाने और नाचने के साथ-साथ क्षेत्र में दावतों का भी रिवाज है। इसी के चलते इन दिनों ग्रामीण महिलाएं पारंपरिक व्यंजन बनाने में व्यस्त हैं। क्षेत्र के हर घर में फपरोऊ, मीठी रोटी, लाडू आदि बनाने का काम जोरों पर है . चुन्हौं गांव की गीता देवी, आरती आदि ने बताया कि पर्व पर पारंपरिक व्यंजन बनाने की परंपरा काफी समय से चली आ रही है. बिस्सू की संक्रांति के दिन ये व्यंजन मुख्य रूप से कन्या के घर वितरण के रूप में भेजे जाते हैं। इसके साथ ही घरों में आने वाले मेहमानों को भी इन पारंपरिक व्यंजनों से खातिरदारी की जाती है.14 अप्रैल को फूलियात पर्व, 15 को गांव स्तर पर बिस्सू मनाया जाता है। 16 अप्रैल को खमरोली, पंजिया डांडा, सैलालानी सहित ग्राम पंचायत स्तरीय बिस्सू पर्व मनाया जाता है। 17 को चोली डांडा, चुराणी डांडा, मोकाबागी, देवड़ी लानी और ठाणा डांडा में बिस्सू पर्व का आयोजन किया जाता है। अंतिम दिन क्वानू में बिस्सू पर्व मनाने की परंपरा है। कोविड के चलते पिछले दो वर्षों तक बड़े पैमाने पर बिस्सू मेले का आयोजन नहीं किया गया। इस साल प्रत्येक गांव में बिस्सू मेले का आयोजन किया जाएगा।

