ग्राम कांडी , PAHAAD NEWS TEAM
बरसात के मौसम के चलते ग्राम कांडी क्षेत्र के बाशिंदें पानी को तरस गए हैं। नलों में पानी की नियमित आपूर्ति न होने से लोगों को मजबूरन बारिश का पानी पीना पड़ रहा है। ऐसे में क्षेत्र के लोगों में संबंधित विभाग के प्रति काफी रोष है।
ग्राम कांडी में पानी की नियमित आपूर्ति नहीं हो पाई है। इससे लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भारी बरसात के मौसम में पानी की आपूर्ति न होने से लोगों को मजबूरन बारिश का पानी पीना पड़ रहा है। ऐसे में कई लोग बीमार पड़ रहे हैं। पानी की करीब दो सप्ताह से क्षेत्र में सप्लाई नहीं हुई है। ऐसे में लोगों को बारिश के मौसम में मजबूरन बारिश का पानी पीना पड़ रहा है। ऐसे में कई लोग बीमार पड़ सकते हैं। ऐसा दूषित पानी पीने से बीमार पड़ने की संभावना अधिक होती है। कोई अफसर इनकी सुध नहीं ले रहा है
ग्रामीण क्षेत्रों के लोग पानी की समस्या से चिंतित हैं, आजादी के 8 दशक बाद से, आज तक, ग्रामीण क्षेत्रों की सरकारों से एक ही मांग रही है। कांडी पम्पिंग योजना अठजुला क्षेत्र में जब भी कोई बड़े कार्यक्रम हुए है, उसमें क्षेत्र की हमेसा एक ही मांग रही पानी की 20 वर्ष प्रदेश सरकार को भी हो चुके है लेकिन कांडी पम्पिंग योजना आज भी नहीं बन सकी है। हर सरकार के मंत्रियों ने इस क्षेत्र में मंचों से पम्पिंग योजना की बड़ी बड़ी घोषणाये की हैं,
लेकिन सभी खाली साबित हुई जब कि पर्यावरण की सन्तुलन को बनाये रखने के लिए पानी का होना अवश्य है। भारत सरकार के दोहरे इंजन की घोषणाएँ भी खाली ही साबित हो रही हैं, जिसमे कहा गया घर घर नलका घर घर पानी इसी कारण गाँव के बड़ा हिसा पलायन करने को भी मजबूर हुए गाँव के लोगों का कहना है,
पानी की कमी के कारण, हम बकरियां, गाय, भैंस, भेड़ें भी नहीं पाल सकते हैं और बागवानी भी नहीं कर सकते हैं, जो बहुत बड़ा रोजगार प्रदान करती है क्योंकि गर्मी आते ही हमें सब कुछ बेचना पड़ता है, बागवानी लगाते है उसमें पानी नही होता आग लगने से सब कुछ नष्ट हो जाता है।
आज तक यहां जितने भी प्रतिनिधि बने हैं, उन्होंने भी इसके लिए कुछ खास नही किया है, लेकिन यह चुनाव और वोटों तक सीमित रह गया है। चुनाव जीतने के बाद, विकास के नाम पर कुछ भी नहीं है, यहां के लोगों की एक मुलभुत पानी की मांग है जो आज तक इस तरह से ही लटकी पड़ी है।
यहां के ग्रामीणों ने इस मांग को प्रशासन के सामने रखा, लेकिन यह केवल फाइलों तक ही सीमित रहा। यह मांग उत्तराखंड के गठन से पहले की है। आज उत्तराखंड बने 20 साल हो चुके हैं, लेकिन यह अभी भी वही पर है।
सभी की जानकारी में यह योजना है, लेकिन यह लोग खाली वोट से आगे तक ने बढ़ी । यह इस क्षेत्र का दुर्भागय है की इस क्षेत्र की जनता की साथ छल किया है ।

