पिथौरागढ़ , PAHAAD NEWS TEAM
पिछले 26 दिनों से बंद तवाघाट- गर्बाधार – लिपुलेख मार्ग को यातायात के लिए खोल दिया गया है. उच्च और मध्य हिमालय के जंक्शन, चलसीता, लामारी के पास पहाड़ की तरफ से अभी भी पत्थर गिर रहे हैं। मार्ग खुलने से व्यास घाटी के सात गांवों समेत सेना, आईटीबीपी, एसएसबी और बीआरओ के लिए राह आसान हो गई है।
उच्च हिमालय में चीन सीमा को जोड़ने वाली तवाघाट- सोबला- तिदांग सड़क 100वें दिन भी यातायात के लिए बंद रही। सड़क बंद होने से तल्ला, मल्ला दारमा , चौदास घाटी के 40 गांवों का संपर्क बहाल नहीं हो सका है। चीन सीमा की ओर जाने वाली तीसरी सड़क मुनस्यारी-मिलम सड़क भी तीन महीने से यातायात के लिए नहीं खुली । सामरिक महत्व के तवाघाट-लिपुलेख मार्ग को यातायात के लिए खोल दिया गया है। शनिवार शाम को इस मार्ग से वाहन गुजरे। पिछले 26 दिनों से फंसे वाहन निकल सकते हैं। सड़क के खुलने से अब व्यास घाटी के साथ गांव बूंदी, गब्र्यांग, गुंजी, नपलच्यु, नाबी, रौंकगोंग और कुटी के ग्रामीणों को राहत मिली है. इसके अलावा सीमा पर तैनात सेना और अर्धसैनिक बलों को भी राहत मिली है.
बताया जा रहा है कि सड़क को यातायात के लिए खोल दिया गया है, लेकिन अभी भी चलसीता और लामारी के पास पहाड़ की तरफ से पत्थर गिर रहे हैं. जिससे यातायात प्रभावित हो रहा है। दूसरी ओर, हजारों लोग अभी भी दारमा मार्ग नहीं खुलने से परेशान हैं। मुनस्यारी से मिली खबर के अनुसार क्वीरीजीमिया गांव के जीमिया तोक की ओर जाने वाला पैदल मार्ग खाई में तब्दील हो गया है. पैरड़ नामक स्थान पर बनी खाई से ग्रामीणों को आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पैरड़ नामक स्थान पर वर्ष 2013 की आपदा से सड़क क्षतिग्रस्त होने लगी थी। साल 2019 में आपदा से सड़क बर्बाद हो गई थी और इस साल की आपदा ने सड़क को खाई में बदल दिया है. ग्रामीण अपनी जान की बाजी लगाकर खाई के बीच में बने नाले को पार कर रहे हैं.

