उत्तरकाशी : पर्वतारोहण के लिए विश्व प्रसिद्ध उत्तरकाशी गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान के कपाट आज शीतकाल के लिए बंद रहेंगे. पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक और पर्वतारोही गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान पहुंचे। गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान और उत्तरकाशी गर्तांगली घूमने के लिए पर्यटकों को अब अगले साल एक अप्रैल तक इंतजार करना होगा।
गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान (उत्तराखंड गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान) दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियों का घर है। गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत गंगोत्री हिमनद की विश्व की सबसे ऊँची चोटियाँ आती हैं, जिन पर प्रतिवर्ष हजारों लोग चढ़ाई करते हैं। इसके साथ ही पर्यटक गौमुख, केदारताल और तपोवन भी पहुंचकर रोमांचकारी ट्रेकिंग करते हैं। भारत-चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ नेलोंग और जादुंग घाटियां भी पार्क के अंतर्गत आती हैं।

बता दें कि सर्दियों के दौरान वन्यजीवों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में 40 ट्रैप कैमरे लगाए जा रहे हैं। पार्क के गेट बंद होने से पहले पार्क प्रशासन ने ट्रैप कैमरे लगाने का काम तेज कर दिया है। ये अत्याधुनिक ट्रैप कैमरे वन्यजीवों की हर एक गतिविधि को कैद करने में सक्षम हैं।
गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान देश का तीसरा सबसे बड़ा उद्यान है। जो 1553 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और 7 हजार मीटर से अधिक की ऊंचाई पर है। पार्क हिम तेंदुआ, अरगली भेड़, भूरा भालू और लाल लोमड़ी सहित जानवरों की कई दुर्लभ प्रजातियों का घर है। हर साल 1 अप्रैल को पार्क क्षेत्र के गेट पर्यटकों और पर्वतारोहियों के लिए खोल दिए जाते हैं और 30 नवंबर यानी आज बंद रहेंगे।

