विकासनगर : जौनसार बावर के सिद्धपीठ महासू देवता के हनोल मंदिर में जागड़ा मेला शुरू हो गया है. इस समय मंदिर परिसर में रात्रि जागरण यानि जागड़ा पर्व मनाया गया । महासू देवता के जागरण में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे । इस मौके पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज भी हनोल पहुंचे। जहां उन्होंने महासू देवता के चरणों में नतमस्तक होकर राज्य की समृद्धि की कामना की।

हनोल स्थित महासू देवता के जागड़ा पर्व पर रात्रि जागरण का आयोजन किया जाता है। जिसमें दूर-दूर से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। भक्त रात भर देवता की स्तुति गाकर मंदिर परिसर में महासू देवता की पूजा करते हैं। इसके साथ ही पारंपरिक नृत्य भी किया जा रहा है। जिसकी शोभा देखते ही बनती है। साल में एक बार होने वाले इस उत्सव में नौकरी पेशा और व्यवसाय के कारण बाहर गए लोग भी देव दर्शन और रात्रि जागरण में शामिल होने के लिए हनोल पहुंचते हैं।

हनोल का जागड़ा राजकीय मेला घोषित: धामी सरकार ने जौनसार बावर के सिद्धपीठ महासू देवता के हनोल मंदिर में लगने वाले पारंपरिक जागरा मेले को राजकीय मेला घोषित किया है. महासू मंदिर हनोल पहुंचे कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में महासू देवता जागड़ा का जिक्र किया है. यह हिमाचल और उत्तराखंड दोनों का एक समन्वित तीर्थ स्थल है। जिसकी पहचान दूर-दूर तक है।

राष्ट्रपति भवन से संबंध : प्रसिद्ध महासू देवता का यह मंदिर चकराता के निकट हनोल में टोंस नदी के पूर्वी तट पर स्थित है। लोगों की आस्था उन्हें इस पवित्र धाम की ओर खींचती है। मंदिर की दिव्यता के बारे में सुनकर देश के अन्य प्रांतों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर की अनूठी वास्तुकला और स्थापत्यकला लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है।

इस मंदिर में भक्तों को प्रकृति की वास्तुकला के साथ-साथ मिश्रित शैली को भी देखने का मौका मिलता है। इस मंदिर को पुरातत्व सर्वेक्षण में भी शामिल किया गया है। जौनसार बावर के साथ, महासू देवता भी हिमाचल प्रदेश के इष्ट देव हैं। इसके साथ ही महासू देवता मंदिर का सीधा संबंध राष्ट्रपति भवन से भी है। दिल्ली से राष्ट्रपति भवन की ओर से हर साल मंदिर में नमक चढ़ाया जाता है।

जौनसार बावर सहित हिमाचल के अधिष्ठाता देवता हैं महासू : आपको बता दें कि प्रसिद्ध महासू देवता के चार भाई हैं। इनमें बोठा महासू, बाशिक महासू, पवासी महासू और चालदा महासू शामिल हैं। बोठा महासू हनोल महासू मंदिर में विराजमान हैं। जबकि बाशिक महाराज का मंदिर मैंद्रथ में स्थित है। वहीं, हनोल से थोड़ी दूरी पर ठडियार में पवासी देवता का मंदिर है। वहीं चालदा महासू को छत्रधारी महाराज भी कहा जाता है। चालदा महासू को न केवल जौनसार बावर के आदिवासी क्षेत्र में बल्कि हिमाचल प्रदेश में भी पीठासीन देवता के रूप में पूजा जाता है।

इस अवसर पर पुरोला विधायक दुर्गेश्वर लाल, जनजाति आयोग के अध्यक्ष मूरत राम शर्मा, एसडीएम सौरभ असवाल, सीओ संदीप नेगी, मंदिर समिति के सचिव मोहनलाल सेमवाल आदि मौजूद थे।