नैनीताल , PAHAAD NEWS TEAM
प्रधान न्यायाधीश आरएस चौहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने बुधवार को रिजर्व शिवालिक हाथी कॉरिडोर को डी-नोटिफाइड करने और दून-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग को चौड़ा करने के खिलाफ दायर अलग-अलग जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की.
इस बीच केंद्र सरकार ने जवाब दाखिल कर कहा है कि देहरादून उत्तराखंड की राजधानी होने के कारण एनएच का चौड़ीकरण जरूरी है। इसके जद में जो पेड़ आएंगे, उनकी जगह पौधरोपण किया जाएगा. यह पूरी प्रक्रिया नियमानुसार की गई है। वहीं, राज्य सरकार ने कहा कि एनएच को चौड़ा करने के लिए केंद्र से मांगी गई मंजूरी दे दी गई है. इसमें राज्य की कोई भूमिका नहीं है।
देहरादून निवासी रीनू पाल और हल्द्वानी के अमित खोलिया ने शिवालिक हाथी रिजर्व फॉरेस्ट की अधिसूचना रद्द करने और दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग को चौड़ा करने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। चौड़ीकरण के मामले में कहा गया कि रजाजी नेशनल पार्क का नौ हेक्टेयर इको सेंसटिव जोन प्रभावित हो रहा है. इसमें करीब 2500 साल पुराने पेड़ हैं। कई 100 से 150 साल पुराने हैं, जिन्हें राष्ट्रीय विरासत घोषित किया गया है। इस तरह के चौड़ीकरण पर रोक लगनी चाहिए।
मामले में याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता अभिजय नेगी ने कहा कि उत्तराखंड में वृक्षारोपण के एवज में वृक्षारोपण का रिकॉर्ड बेहद खराब रहा है. यहां की परियोजनाओं से हुए नुकसान का फायदा दूसरे राज्य उठा रहे हैं। हाईकोर्ट ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद अगली सुनवाई के लिए 8 सितंबर की तारीख तय की है।

