धनोल्टी , PAHAAD NEWS TEAM
मनरेगा योजनाओं के सामग्री भुगतान की मांग को लेकर विकासखंड थौलधार प्रखंड के पूर्व प्रधान सदस्य क्षेत्र पंचायतों की ओर से बैठक आयोजित की गई . इसके साथ ही सीडीओ टिहरी को तहसील कंडीसौड़ के माध्यम से ज्ञापन भेजा गया.
क्षेत्र पंचायत के पूर्व सदस्य मनवीर पंवार ने बताया कि वर्ष 2017-18 और 2018-19 में मनरेगा के तहत जनप्रतिनिधियों द्वारा अपने-अपने क्षेत्र में विकास कार्य कराए गए. जिसमें से 144 विकास योजनाओं की फिजिकल फाइलों को भौतिक रूप से दिखाकर श्रमिकों को भुगतान किया गया। लेकिन सामग्री का भुगतान नहीं होने के कारण जब जनप्रतिनिधियों द्वारा बार-बार तत्कालीन प्रखंड विकास अधिकारी एवं उप कार्यक्रम अधिकारी से सामग्री के हिस्से के भुगतान के लिए अनुरोध किया गया, तो उन्हें जल्द भुगतान का आश्वासन दिया गया है.

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वहीं जब पूर्व जनप्रतिनिधियों के प्रतिनिधिमंडल द्वारा जिलाधिकारी से शिकायत की गई तो तो जिलाधिकारी के द्वारा उक्त प्रकरण के लिए खंड विकास अधिकारी देवप्रयाग को जांच अधिकारी नामित कर बिन्दुवार जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया । जांच अधिकारी द्वारा जांच के दौरान पाया गया कि तत्कालीन प्रखंड विकास अधिकारी सेवानिवृत्त भगवती प्रसाद डबराल और प्रभारी प्रखंड विकास अधिकारी स्वर्गीय विनोद रावत नेबिल भुगतान एवं भौतिक रूप से पूर्ण करने के लिए कोई अनुश्रवण किया गया और न ही पत्रावलियों में इस के लिए कहीं उनके हस्ताक्षर पाए गए ।
जांच के दौरान उप कार्यक्रम अधिकारी एवं लेखाकार द्वारा सूचित किया गया कि फील्ड कर्मचारियों द्वारा भुगतान हेतु प्रखंड कार्यालय में पत्र प्रस्तुत किया जाता है, जोकि लेखाकार द्वारा जांच के पश्चात कंप्यूटर ऑपरेटर को बिल एमआई एस एवं भौतिक रूप से पूर्ण करने के लिए दी जाती है. यह भी बताया गया कि तत्कालीन कंप्यूटर ऑपरेटर सतीश कुमार द्वारा कागजी कार्रवाई को भौतिक रूप से पूरा किया गया था। जांच के दौरान उप कार्यक्रम अधिकारी एवं लेखाकार द्वारा बताया गया कि प्रखंड का कार्य पूर्ण करने की दर कम होने के कारण तत्कालीन कम्प्यूटर आपरेटर सतीश कुमार एवं तत्कालीन उप कार्यक्रम अधिकारी नरेन्द्र भंडारी ने बिना बिल फीड किये ही पत्र को भौतिक रूप से पूर्ण किया था. एमआईएस।
उक्त 144 पत्रावलियां को 9 मई 2019 से 2 जुलाई 2020 तक पूर्ण कर लिया गया है। तत्कालीन कार्यशील प्रखंड विकास अधिकारी एवं तत्कालीन उप कार्यक्रम अधिकारी द्वारा उक्त योजनाओं को चालू योजनाओं में परिवर्तित करने हेतु प्रकोष्ठ को कोई सूचना न दिये जाने के संबंध में कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया। जिसके बाद मुख्य विकास अधिकारी के द्वारा उक्त प्रकरण मे मुख्य विकास अधिकारी के द्वारा अपर सचिव/अधिशासी निदेशक राज्य महात्मा गाधी मनरेगा प्रकोष्ठ ग्राम्य विकास विभाग उत्तराखंड शासन देहरादून को 17 अप्रैल 2021 को भेजे गए पंत्राक 132/मनरेगा/32-एमआईएस 2021-22 के द्वारा खंडविकास अधिकारी देव प्रयाग द्वारा जांच आख्या के आधार पर संलग्न सूची में उल्लिखित कार्यों को आनगोइंग करवाने के लिए पत्र भेजा गया.
वहीं, सामग्री भाग के शेष भाग का भुगतान संबंधित योजनाओं पर किया जा सकता है। लेकिन विभाग ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। जल्द ही इसका समाधान नहीं हुआ तो वे इसके लिए आंदोलन करेंगे। उप कार्यक्रम अधिकारी नरेंद्र भंडारी ने कहा कि फाइलों की जांच की गई है, फाइलों के भौतिक रूप से पूरा होने के बाद मामला सरकार के अधीन है. सॉफ्टवेयर खुलते ही भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

