देहरादून , PAHAAD NEWS TEAM
देहरादून कांग्रेस भवन में पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत की प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई . हरीश रावत ने ट्वीट कर आरोप लगाया था कि वह प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी सरकार द्वारा उत्तराखंड में आचार संहिता के उल्लंघन का पर्दाफाश करेंगे. हरीश रावत ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में विभागवार उदाहरण देकर आचार संहिता के उल्लंघन के मामलों को गिनाया. हरीश रावत ने कहा कि वह चुनाव आयोग से इन मामलों पर कार्रवाई करने का अनुरोध करते हैं। चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले इन कार्यों में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
हरीश रावत का ट्वीट: पिछले 24 घंटे में हरीश रावत के ट्वीट्स पर नजर डालें तो उन्होंने बीजेपी सरकार पर आचार संहिता के उल्लंघन के कई आरोप लगाए हैं. उन्होंने लिखा कि ‘सरकार ने किसान आयोग और बाल संरक्षण आयोग, महिला आयोग, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष आदि में कई नियुक्तियां की हैं और ये सभी नियुक्तियां आचार संहिता लागू होने के बाद की गई हैं. क्या यह आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन नहीं है।
मैं इलेक्शन कमीशन उत्तराखंड के संज्ञान में लाना चाहता हूंँ, ये उत्तराखंड #सचिवालय में क्या हो रहा है? आचार संहिता लगने के बाद भी बैक डेट में ट्रांसफर्स हो रहे हैं, प्रवक्ताओं और शिक्षकों के पदों पर बड़ी मात्रा में RSS से जुड़े हुए लोगों के ट्रांसफर्स हुये हैं, . .. 1/2 pic.twitter.com/mb7ecX60tA
— Harish Rawat (@harishrawatcmuk) January 9, 2022
एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा कि को-ऑपरेटिव बैंकों में अभी भी नियुक्तियां चल रही हैं। जब हरिद्वार से विरोध आया तो नियुक्तियां बंद हो गईं और अब पिछले दरवाजे से नियुक्तियां करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने सचिवालय में भी चहेतों का ट्रांसफर करने का भी आरोप लगाया । उन्होंने कहा कि आचार संहिता लगने के बाद भी पिछली तारीख में तबादले हो रहे हैं. बड़ी संख्या में आरएसएस से जुड़े लोगों को प्रवक्ताओं और शिक्षकों के पदों पर स्थानांतरित किया गया।
#कोऑपरेटिव बैंकों में अब भी नियुक्तियां जारी हैं, हरिद्वार से विरोध आया तो नियुक्तियां रुकी और अब पिछले दरवाजे से नियुक्तियां करने की कोशिश हो रही है। मुझे भरोसा है कि चुनाव आयोग इसका संज्ञान लेगा।#ElectionCommission #uttarakhand pic.twitter.com/9lnnxpJQ7j
— Harish Rawat (@harishrawatcmuk) January 9, 2022
वहीं हरीश रावत ने आबकारी आयुक्त को हटाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब रहस्य समझ में आया है कि आबकारी आयुक्त को क्यों हटाया गया? आबकारी आयुक्त होते तो सरकार ऐसा जनादेश नहीं कर पाती जिसमें करोड़ों रुपये का खेल हो चुका हो. यह आदेश आचार संहिता लागू होने के बाद किया गया है। यह आबकारी विभाग में किया गया है जिसके जरिए जो उच्च स्पेसिफाइड मदिरा है, उसके विक्रय के लिए कई नियमों को शिथिल करते हुए लोगों को उपकृत किया गया है और सरकार को भी बाध्य किया गया है.

