नैनबाग , PAHAAD NEWS TEAM
सहकारिता के जनक स्वर्गीय सरदार सिंह रावत पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया गया। इस मौके पर नैनबाग शहर सहित आसपास के ग्रामीण काफी संख्या में मौजूद रहे। स्व. सरदार सिंह रावत की प्रतिमा को पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया गया। सभा में उपस्थित अतिथियों ने स्व. सरदार सिंह रावत के व्यक्तित्व और चरित्र पर प्रकाश डाला और स्व. सरदार सिंह रावत के उद्देश्य व उनके द्वारा बताए गए पद चिन्हों पर चलने का संकल्प लिया गया
जनसेवा की भावना मन में हो तो उसके लिए उम्र कोई मायने नहीं रखती। यह सन्देश सरदार सिंह रावत ने 1964 में दिया था, जब 12वीं की परीक्षा पास कर मात्र 20 वर्ष की आयु में उन्होंने नैनबाग में जूनियर हाई स्कूल की स्थापना की और इस विद्यालय में अवैतनिक शिक्षण कार्य को जनसेवा का माध्यम बनाया। उनकी जनसेवा की भावना और व्यापक सोच के फलस्वरूप वे 1972 में ग्राम पंचायत पाब व 1977 में ग्राम पंचायत टटोर के निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए। इसी क्रम में 1983 में उन्हें जौनपुर के प्रखंड प्रमुख के रूप में चुना गया। 1989 में, जिला पंचायत उपाध्यक्ष, टिहरी हुए ।
सरदार सिंह रावत का व्यक्तित्व उनके प्रतिनिधि से बड़ा था। जौनपुर के विकास के सपने को संजोते हुए और उन सपनों को साकार करने के लिए उन्होंने 1977 में नैनबाग में जनजाति क्रीड़ा एवं सांस्कृतिक समारोह की शुरुआत की। हमारी पीढ़ी के युवा इस परंपरा को आगे बढ़ाने की कोशिश करते रहे हैं, हालांकि इसका स्वरूप बदल गया है।
उनका सार्वजनिक जीवन पारदर्शी और समाज के प्रति समर्पित था। उन्होंने भाषा पर संयम और कलम की शक्ति का सही उपयोग करके सामाजिक और राजनीतिक जीवन कैसे जीना है, इसका उदाहरण उन्होंने बार-बार प्रस्तुत किया।

