देहरादून , PAHAAD NEWS TEAM
उत्तराखंड सरकार अब प्रदेश में फूल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए आत्मनिर्भर उत्तराखंड योजना के तहत कार्ययोजना तैयार कर रही है. इस कार्य योजना के तहत आगामी वित्तीय वर्ष में बजट की व्यवस्था भी की जाएगी। साथ ही इस योजना के तहत उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल संभाग में दो मंडियां खोली जाएंगी ताकि फूल उत्पादन के बाद बाजार उपलब्ध कराया जा सके.
कुमाऊं मंडल के हल्द्वानी या रामनगर में और गढ़वाल मंडल के लिए ऋषिकेश में बाजार खोलने की योजना है. दिल्ली मंडी जाने वाले फूलों के लिए भी काश्तकारों की मांग पर सरकार और नीति आयोग को प्रस्ताव भेजा गया है. इसके साथ ही काठगोदाम रेलवे स्टेशन पर कैरियर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रेल मंत्रालय को भी भेजा गया है।
उद्यान एवं कृषि कल्याण सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि कोरोना काल के कारण राज्य में फूलों का उत्पादन और उसका व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हुआ है. कोरोना काल में मंदिर, शादियां और सभी कार्यक्रम बंद रहे। इसके साथ ही राज्य में फूल मंडी नहीं होने के कारण उत्तराखंड से पहले फूल दिल्ली के बाजार में जाते थे। उसके बाद वे वहां से वापस राज्य में बेचने के लिए आते थे। इसे देखते हुए अब आत्मनिर्भर उत्तराखंड योजना के तहत 3 व 5 साल का लक्ष्य तैयार किया गया है। इस योजना में फूल उत्पादन के लिए विशेष कार्य योजना भी तैयार की गई है।
आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि अगले वित्तीय वर्ष में राज्य में फूल उत्पादन बढ़ाने के लिए बजट उपलब्ध कराकर दो मंडियों का निर्माण किया जायेगा. पिछले दिनों नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने अपने उत्तराखंड दौरे के दौरान फूल उत्पादन से जुड़े काश्तकारों से मुलाकात की थी, जिसमें किसानों ने मांग की थी कि काठगोदाम स्टेशन से मंडी तक फूलों के परिवहन के लिए रेलवे की ओर से एक वाहक उपलब्ध कराया जाए. जिसके लिए उत्तराखंड सरकार और नीति आयोग की ओर से रेल मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है। जिस पर जल्द ही नतीजे आएंगे।
आपको बता दें, उत्तराखंड में लगभग 609 हेक्टेयर भूमि पर फूलों का उत्पादन होता है। राज्य में फूलों का कारोबार करीब 250 करोड़ रुपये का है, जिससे राज्य के करीब 10 हजार परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है.

