टिहरी , पहाड़ न्यूज टीम
एक दशक बाद प्रतापनगर प्रखंड के भरपूर और स्यालगी गांव में फिर से खेती होगी. यहां की सिंचाई नहरें वर्ष 2012-13 में दैवीय आपदा की भेंट चढ़ गई थीं। जिससे कृषि प्रभावित हो रही थी, लेकिन अब मनरेगा के तहत सिंचाई नहर का पुनर्निर्माण किया गया है। जिससे बंजर खेतों में पानी पहुंचना शुरू हो गया है। ऐसे में अब गांव वालों में भी अच्छी खेती की आस जग गई है.
दरअसल, वर्ष 2012-13 में प्रतापनगर प्रखंड की जलकुर नदी में भीषण तबाही हुई थी. जिससे पिपलोगी, सेरा, बैल्डोगी, स्यालगी, भरपूर आदि गांवों के हजारों नाली, सिंचित कृषि और गांव की नहरें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं थी . भरपूर और स्यालगी गांव के लोगों की सिंचाई नहरें जलकुर नदी में समाने के कारण कई हेक्टेयर भूमि बंजर होती चली गई । उन्होंने प्रशासन से नहर बनाने की गुहार लगाई।
वहीं भरपूर गांव की क्षेत्र पंचायत सदस्य आरती देवी ने ग्रामीणों की दुर्दशा को समझते हुए खेतों को आबाद करने के लिए नहर बनाने का फैसला किया. जिसके बाद आरती देवी के प्रस्ताव पर मनरेगा के तहत नहर की मरम्मत का काम शुरू किया गया. जिसमें गांव के 70 जॉब कार्ड धारकों ने 15 दिन में नहर की मरम्मत की.
उन्होंने क्षेत्र पंचायत कोष एवं अन्य स्रोतों से मात्र 4 लाख रुपये की लागत से गांव की डाबर नामे तोक वाली नहर का पुनर्निर्माण करवाया। इसके साथ ही जलकुर नदी पर 14 मीटर लंबा और 3 मीटर ऊंचा, डेढ़ मीटर ऊंचा स्पैन तैयार किया गया। जिसके बाद नहर बनाकर खेतों की सिंचाई के लिए पानी बहने लगा है। नहर के निर्माण से गांव के 200 परिवारों को कृषि की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करा दिया गया है.
इसके अलावा सैकड़ो परिवारों की सिंचित खेती को आबाद करने के लिए मनरेगा के तहत स्यालगी गांव के सेरा नामे तोक नहर का भी पुनर्निर्माण किया गया है. प्रतापनगर के प्रखंड प्रमुख प्रदीप रमोला ने भी सदस्य की भावना की सराहना की है. उन्होंने कहा कि यदि सभी जनप्रतिनिधि इस तरह से गांव के विकास के लिए काम करें तो पूरे गांव का चहुंमुखी विकास होगा.

