देहरादून : राजधानी देहरादून में बीते दिन पुलिस ग्रेड-पे को लेकर प्रेस वार्ता हुई, जिसमें कई पुलिसकर्मियों के परिवार शामिल हुए. उत्तराखंड में पुलिस ग्रेड-पे को लेकर लंबे समय से पुलिसकर्मी आंदोलन भी कर रहे हैं, लेकिन अब पुलिस मुख्यालय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए पुलिस आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी पाए जाने पर तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।

उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय ने आंतरिक जांच में पाया कि ये पुलिसकर्मी कहीं न कहीं इस पूरे मामले से जुड़े हुए नजर आए. इन पुलिसकर्मियों में एक पुलिसकर्मी चमोली जिले का है, दूसरा उत्तरकाशी का और तीसरा पुलिसकर्मी देहरादून पुलिस मुख्यालय में तैनात है. इन पुलिसकर्मियों के नाम कुलदीप भंडारी, दिनेश चंद्रा और हरेंद्र रावत हैं. इन सभी पुलिसकर्मियों के परिजन सोमवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए थे. वहीं, पुलिसकर्मियों के निलंबन को तानाशाही बताते हुए परिजनों ने आंदोलन जारी रखने की बात कही है.

वहीं इस कार्रवाई को लेकर डीजीपी अशोक कुमार ने कहा कि पुलिस अनुशासित बल है और इस तरह की अनुशासनहीनता स्वीकार्य नहीं है. पुलिस के नियमों के विरुद्ध कार्य किया गया है। डीजीपी ने पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा है कि उनकी मांगों को सरकार के पास भेज दिया गया है, लेकिन उनकी मांगों को लेकर किसी भी तरह की अनुशासनहीनता न करें, क्योंकि ऐसा व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.

गौरतलब है कि 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले पुलिसकर्मियों के परिजन ग्रेड-पे को लेकर सरकार के खिलाफ खुलकर सड़कों पर उतर आए थे. वे पूरे राज्य में बीजेपी को वोट नहीं देने की अपील कर रहे थे. इसके बावजूद सरकार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई। अब देखना होगा कि पुलिसकर्मियों पर इस कार्रवाई के बाद इस आंदोलन को क्या दिशा मिलती है. पुलिसकर्मियों की आगे की आवाजाही कैसे होती है वरना पूरे मामले को शांत कराने के लिए सरकार अपने स्तर पर हस्तक्षेप करेगी।