रामनगर: भारत के सबसे प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यानों में से एक है जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क . और एशिया में बनने वाला पहला राष्ट्रीय उद्यान भी है। उत्तराखंड के रामनगर में स्थित यह पार्क 1318 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है और पक्षियों, पौधों और जानवरों की हजारों प्रजातियों का घर है। लेकिन, कॉर्बेट में अधिकारियों की मनमानी का एक और नया मामला सामने आया है। कॉर्बेट में बने गर्जिया जोन को एनटीसीए (राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण) की अनुमति के बिना शुरू किया गया था।

दो साल बाद पार्क अधिकारियों को मामले की जानकारी मिलने के बाद तत्काल पार्क को बंद करने की कार्रवाई की गई है. जोन में 57 नेचर गाइड समेत जोन से जुड़े 300 से अधिक जिप्सी चालक व होटल व्यवसायी रोजी-रोटी का संकट झेल रहे हैं. दरअसल, कुछ समय से कॉर्बेट में अधिकारियों द्वारा मनमाने ढंग से कालागढ़ में अवैध कटाई और अवैध निर्माण कार्य के मामले सामने आ रहे थे. जिसके बाद से तत्कालीन डीएफओ किशनचंद समेत वन विभाग के कई बड़े अधिकारियों के खिलाफ जांच चल रही है और राज्य सरकार को भी इस मामले में काफी तूल पकड़ा है.

आपको बता दें कि कॉर्बेट नेशनल पार्क के बिजरानी जोन के बफर जोन में गर्जिया जोन का निर्माण किया गया है. इस जोन को सर्पदुली रेंज और बिजरानी रेंज को जोड़कर बनाया गया है। इसमें दो चौड़े रिंगौड़ा और फूलताल हैं, जिनमें वन्यजीवों की आवाजाही या विचरण को आसानी से देखा जा सकता है।

वहीं इस जोन की विशेषता पहाड़ियां हैं, यह क्षेत्र 40 वर्ग हेक्टेयर में फैला हुआ है, जिसमें हिरन, सांभर, भालू, हाथी, बाघ, तेंदुए आदि घूमते हैं। पूरे मामले में पार्क निदेशक डॉ. धीरज पांडे ने बताया कि कॉर्बेट में पर्यटन क्षेत्र खोलने के लिए एनटीसीए यानी राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण की अनुमति लेना जरूरी है. इसके बिना कॉर्बेट में कोई भी टूरिज्म जोन नहीं खुल सकता है। लेकिन कागज पर गर्जिया जोन की इजाजत नहीं है। ऐसे में जोन में पर्यटन गतिविधियों पर तत्काल रोक लगा दी गई है।