उत्तरकाशी : उत्तरकाशी के द्रौपदी का डांडा द्वितीय शिखर चढ़ाई के दौरान हिमस्खलन की घटना में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के दो प्रशिक्षु अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है. एसडीआरएफ की टीम क्रेवास में उतरने के बाद लापता प्रशिक्षुओं की तलाश कर रही है. वहीं, सेना की सेंटर कमांड लखनऊ के डॉग स्क्वायड में तैनात इंद्रा और रजिया ने भी लापता पर्वतारोहियों को खोजने में अहम भूमिका निभाई है.

17 हजार फीट की ऊंचाई पर पांच दिनों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान इन दोनों कुत्तों ने चार शवों को तलाश किया . ऐसे कई बचाव कार्यों में इंद्रा और रजिया ने अहम भूमिका निभाई है। द्रौपदी का डांडा II हिमस्खलन की चपेट में आने से मारे गए 29 पर्वतारोहियों के परिवारों ने घटना के लिए नेहरू पर्वतारोहण संस्थान को जिम्मेदार ठहराया है।

वहीं, हाई एल्टीट्यूड वॉरफेयर स्कूल गुलमर्ग, आईटीबीपी, एसडीआरएफ, सेना, वायु सेना और एनडीआरएफ एवं निम के जवान लापता पर्वतारोहियों की तलाश में लगे हैं. इन टीमों का साथ दे रहे हैं सेना के दो बहादुर कुत्ते , जिनके नाम इंद्रा और रजिया हैं। इंद्रा 5 साल का है और रजिया 6 साल की लेब्राडोर नस्ल के कुत्ते हैं और जन्म से ही सेना में सेवा कर रही हैं।

सेना के जवानों के मुताबिक इन दोनों कुत्तों ने 17 हजार फीट की ऊंचाई पर रेस्क्यू ऑपरेशन में हिस्सा लिया और 4 पर्वतारोहियों के शवों की तलाशी ली. इंद्रा के हैंडलर लांस नायक प्रभुदास और रजिया के हैंडलर लांस नायक शुभंकर पाल ने बताया कि दोनों जन्म से ही सेना में हैं। दोनों अब तक कई रेस्क्यू ऑपरेशन में हिस्सा ले चुके हैं। दोनों डोकरानी बामक ग्लेशियर क्षेत्र इलाके में रेस्क्यू के दौरान पांच से छह घंटे काम करते थे।

मंगलवार को इंद्रा और रजिया वायुसेना के हेलीकॉप्टर से मातली हेलीपैड पहुंचे। वह अभी कुछ दिनों तक तेखला में आर्मी कैंप में रहेंगी। संभावना है कि जरूरत पड़ने पर उन्हें दोबारा मौके पर भेजा जाएगा।