उत्तरकाशी। केंद्रीय मंत्री पर्यटन, संस्कृति, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास जी. किशन रेड्डी ने उत्तरकाशी जिले के सीमावर्ती गांवों का दौरा किया और भारत सरकार की ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों के तेजी से विकास और स्थानीय निवासियों की बेहतरी के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के सभी विभागों के ठोस प्रयासों पर जोर दिया। रेड्डी ने कहा कि सीमावर्ती लोग देश की सीमाओं के स्वाभाविक चौकीदार हैं, इसलिए उन्हें सशक्त बनाकर देश को मजबूत और सुरक्षित बनाया जा सकता है.
रेड्डी अपने दो दिवसीय दौरे पर रविवार सुबह हर्षिल पहुंचे और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल के अधिकारियों एवं कर्मियों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना. उन्होंने सीमा सुरक्षा में बल के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि देशवासियों को हमारे वीर हिममानवों पर गर्व है। उन्होंने इस अवसर पर उपस्थित बल की महिला सिपाहियों के जज्बे की सराहना करते हुए कहा कि अब महिलाएं भी समाज के हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।उन्होंने कहा कि सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में संचार और सड़क सुविधाओं के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दे रही है, जिससे सीमाओं पर तैनात कर्मियों को भी सुविधा होगी. रेड्डी ने हर्षिल मिलिट्री कैंप में सेना के जवानों से भी मुलाकात की और देश की रक्षा के लिए लड़ रहे जवानों का हौसला बढ़ाया।

केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने अपने दौरे के दौरान मुखवा गांव में आयोजित एक जनसभा में सीमावर्ती गांवों के निवासियों से बातचीत की. रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है. इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने देश के 600 से अधिक सीमावर्ती गांवों के तेजी से विकास और स्थानीय निवासियों के कल्याण पर ध्यान केंद्रित किया है।
इसके लिए प्रधानमंत्री ने पहले चरण में वाइब्रेंट विलेज योजना की शुरुआत कर अपने कैबिनेट मंत्रियों को सीमावर्ती गांवों में जाकर वहां की समस्याओं और जरूरतों की समीक्षा करने का निर्देश दिया है. इस योजना के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के प्रभावी प्रावधान तथा व्यापक एवं सतत विकास की योजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन के साथ-साथ स्वरोजगार के नए अवसरों के सृजन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ताकि सीमावर्ती गांवों से पलायन न हो, ये गांव समृद्ध और मजबूत बन सकें।
रेड्डी ने कहा कि यह सीमांत क्षेत्र, गंगा का मायका, धार्मिक और आध्यात्मिक वैभव के साथ-साथ अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता और अद्वितीय सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध है। उन्होंने मुखवा गांव को आध्यात्मिक और पर्यटन गांव घोषित करने का आश्वासन देते हुए कहा कि स्वरोजगार और आर्थिक उत्थान के लिए हमें होम स्टे और स्थानीय उत्पादों के विपणन जैसे संभावित क्षेत्रों पर ध्यान देना होगा.
रेड्डी ने कहा कि होम स्टे के लिए कर्ज की मंजूरी में आने वाली बाधाओं को दूर करने का प्रयास किया जाएगा. उन्होंने अधिकारियों को महिला स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने और समूहों के उत्पादों के वित्तपोषण और विपणन की सुविधा प्रदान करने के भी निर्देश दिए। श्री रेड्डी ने नई दिल्ली में ‘बुडेरा’ ब्रांड के उत्पादों के लिए एक व्यापार मेला आयोजित करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जंगल मोटर मार्ग के निर्माण में आ रही बाधाओं को दूर करने के प्रभावी प्रयास किये जायेंगे.
इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री पोषाहार, मध्यान्ह भोजन एवं अन्य केन्द्र प्रायोजित योजनाओं की समीक्षा की तथा आंगनबाड़ी केन्द्र मुखवा एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हर्षिल का भी निरीक्षण किया. केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार, राज्य के शीर्ष अधिकारियों और उद्योग संघों और पर्यटन क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन के विकास पर भी चर्चा की।कान्फ्रेंसिंग में भारत सरकार के पर्यटन विभाग के अपर सचिव राकेश कुमार वर्मा, पर्यटन सचिव उत्तराखंड सचिन कुर्वे, जिलाधिकारी अभिषेक रूहेला आदि ने भाग लिया.
अपने दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने झाला गांव का दौरा किया और कोल्ड स्टोरेज व अन्य कार्यों का निरीक्षण किया.
केंद्रीय मंत्री के दौरे के दौरान जिलाधिकारी अभिषेक रूहेला, उप जिलाधिकारी चतर सिंह चैहान, डी.एफ.ओ. पुनीत तोमर, सी.एम.ओ.डा. आरसीएस पंवार, जिला शिक्षा अधिकारी पदमेन्द्र सकलानी, पर्यटन अधिकारी जयपाल सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष सत्येन्द्र राणा, गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष हरीश सेमवाल, सचिव सुरेश सेमवाल, भाजपा ओबीसी मोर्चा जिलाध्यक्ष भगवान सिंह राणा,मंडल अध्यक्ष भटवाड़ी जितेंद्र सिंह राणा, ग्राम प्रधान शिवकला, दिनेश सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि व अधिकारी उपस्थित थे.
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