चकराता (देहरादून) जौनसार-बावर , PAHAAD NEWS TEAM

देश और दुनिया में सिंगल फैमिली का चलन तेजी से बढ़ रहा है। बदलते समय में समाज में एकल परिवार की अवधारणा फल-फूल रही है। इसके कारण संयुक्त परिवार की परंपरा टूट रही है, जिसके कारण कई लोग अपने बूढ़े माता-पिता को उनके हाल पर छोड़ कर किनारा कर लेते है।समाज में इस तरह की प्रवृत्ति बढ़ने से मानवीय संवेदनाओं का अंत हो रहा है, लेकिन तमाम बदलाव के बावजूद जनजाति क्षेत्र जौनसार-बावर में पुश्तैनी समय से चली आ रही संयुक्त परिवार की परंपरा अब भी बरकार है | आधुनिक युग में जौनसार में संस्कारों को सम्मिलित करते हुए संयुक्त परिवार की परंपरा घर-परिवार को संगठित रखते हुए सामाजिक एकता की मिसाल पेश कर रही है। एक छत के नीचे आम चूल्हे की परंपरा जौनसारी समाज की विरासत संस्कृति का हिस्सा है, जो परिवार के सदस्यों को समाज में सुख-दुख में एक साथ रहना सिखाती है। संयुक्त परिवार परंपरा का यह जीवंत उदाहरण अन्यत्र कहीं और देखने को मिलेगा ।

समय के साथ समाज में आए तमाम बदलावों के बावजूद अपनी अनूठी संस्कृति के लिए देश और दुनिया में मशहूर जौनसार-बावर का क्षेत्र सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है। देहरादून जिले के लगभग ढाई लाख की आबादी वाले जौनसार-बावर की कुल 39 खतों में 365 राजस्व ग्राम और इतने की तोक-मजरें है। प्रशासनिक दृष्टि से त्यूणी, चकराता और कालसी तीन तहसील और चकराता व कालसी दो प्रखंडों में विभाजित किया गया है। जौनसार-बावर में सैकड़ों परिवार संयुक्त रूप से रहते हैं। कई ऐसे बड़े परिवार भी हैं जिनमें घर में सदस्यों की संख्या 50 से 100 के बीच है। इसके अलावा, हर गांव में 30 से 40 सदस्यों के बीच संयुक्त परिवार हैं। जौनसार में करीब 15 हजार संयुक्त परिवार एक ही छत के नीचे अपना सुख-दुख बांटते हैं. कई परिवारों में तीन से चार पीढ़ियां एक साथ अपने अनुभव साझा करती हैं। ऐसे में नई पीढ़ी को संस्कृति और संस्कार की सीख विरासत में मिल रही है। आधुनिकता की चकाचौंध भी जौनसार-बावर में पुश्तैनी काल से चली आ रही संयुक्त परिवार की परम्परागत और विरासत में मिली संस्कृति की ऊंची दीवार नहीं तोड़ पाई।

चकराता विधायक के कुनबे में 70 से ज्यादा सदस्य

जौनसार-बावर के गांव बृनाड़ निवासी चकराता विधायक व प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रीतम सिंह का कुनबा काफी बड़ा हैं | इनके संयुक्त परिवार में सदस्यों की संख्या 70 से अधिक है। परिवार के सभी सदस्य एक साथ रहते हैं। इसी तरह चिल्हाड़ गांव निवासी पूर्व जिला पंचायत सदस्य एवं स्याणा जयदत्त बिजल्वाण के संयुक्त परिवार में सदस्यों की संख्सा करीब 90 है।
अणू गांव निवासी उत्तराखंड आदिवासी आयोग के अध्यक्ष मूरतराम शर्मा के संयुक्त परिवार में सदस्यों की संख्या करीब 40 है. बुल्हाड़ गांव निवासी आयकर आयुक्त आईआरएस रतन सिंह रावत और राज्य एप्पल फेडरेशन के अध्यक्ष प्रताप सिंह रावत. संयुक्त परिवार में लगभग 50 सदस्य हैं। मोहना गांव निवासी स्याणा महेंद्र सिंह चौहान के संयुक्त परिवार में सदस्यों की संख्या 40 से अधिक है। टुंगरा गांव निवासी सुप्रसिद्ध चित्रकार नंदलाल भारती के संयुक्त परिवार में सदस्यों की संख्या करीब 45 है.

कुल्हा निवासी शिक्षा विभाग में कार्यरत प्रखंड समन्वयक मोहनलाल शर्मा के संयुक्त परिवार में 60 से अधिक सदस्य हैं. लखवाड़ निवासी पूर्व अध्यक्ष तरुण संघ खत लखवार जितेंद्र चौहान के संयुक्त परिवार में करीब 40 सदस्य हैं. दुधौऊ निवासी सेना मेडल से सम्मानित पूर्व कैप्टन चंद्रसिंह चौहान व उत्तराखंड कबड्डी फेडरेशन के अध्यक्ष आनंद चौहान के संयुक्त परिवार में सदस्यों की संख्या करीब 50 है। रानीगांव निवासी पूर्व कनिष्ठ प्रमुख खजान नेगी के संयुक्त परिवार में सदस्यों की संख्या करीब 40 है । लोक परंपरा के अनुसार जितना बड़ा परिवार होता है समाज में उस परिवार का उतना ज्यादा रुतबा रहता है।