रुद्रपुर , PAHAAD NEWS TEAM
असाध्य रोग पैंक्रियाटाइटिस की दवा को लेकर पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय और पद्मश्री बालेंदु प्रकाश के बीच समझौता हुआ है. समाज के लाभ के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सा का उपयोग कैसे करें? इसको लेकर वैज्ञानिकों द्वारा शोध किया जाएगा। इस समझौते के बाद कुलपति डॉ. तेज प्रताप ने संभावना जताई है कि आने वाले समय में विश्वविद्यालय में वैदिक कृषि के नाम से एक कॉलेज चलाया जाएगा.
आपको बता दें, कार्यक्रम में पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. तेज प्रताप, निदेशक अनुसंधान डॉ. एएस नैन और पद्मश्री बालेंदु प्रकाश ने अनुबंध पर हस्ताक्षर किए. इस अनुबंध के तहत पैंक्रियाटाइटिस रोग में इस्तेमाल होने वाली दवा के लिए नोबेल पुरस्कार परियोजना शुरू करने का निर्णय लिया गया है, जिसमें विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा शोध किया जाएगा।
कार्यक्रम में सांसद अजय भट्ट और विधायक राजेश शुक्ला भी मौजूद थे. इस मौके पर कुलपति डॉ. प्रताप ने कहा कि इस अनुबंध से विश्वविद्यालय के नए आयाम स्थापित करने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि यह मिशन छोटा नहीं है बल्कि भविष्य में एक बड़े और प्रभावशाली कार्यक्रम के रूप में सामने आएगा। उन्होंने संभावना व्यक्त की कि कृषि विश्वविद्यालय और आयुर्वेद का समावेश देश के लिए एक महान उदाहरण बनेगा। भविष्य में विश्वविद्यालय में वैदिक कृषि के नाम से महाविद्यालय भी चलाया जा सकता है।
पैंक्रियाटाइटिस रोग क्या है?
पैंक्रियाटाइटिस आपके अग्न्याशय में होने वाली सूजन है, जो ग्रंथि के प्रगतिशील विनाश का कारण बनता है। इससे ग्रंथि को स्थायी नुकसान हो सकता है। इसके बाद अग्न्याशय में पथरी और अल्सर का विकास हो सकता है, जो आपकी आंत में पाचन रस को प्रवाहित करने वाली नली को बंद कर देते है। इससे आपके शरीर को खाना पचाने और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मुश्किल होगी। इससे कुपोषण और मधुमेह हो सकता है।

