देहरादून। उत्तराखंड के पारंपरिक खाद्य उत्पादों, स्थानीय किसानों और समृद्ध पहाड़ी संस्कृति को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए देहरादून में “हिमालयन समूण कैफे – हिमालय का उपहार” का शुभारंभ किया गया। कैफे का उद्घाटन रायपुर विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’ ने किया।

यह कैफे केवल एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं, बल्कि ‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की भावना को सशक्त बनाने वाला एक मंच है। इसका उद्देश्य राज्य के पारंपरिक उत्पादों जैसे मंडुवा, झंगोरा, गहत, भट्ट, जखिया और अन्य स्थानीय कृषि उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना तथा किसानों की आय बढ़ाने में सहयोग देना है।

इस पहल की संस्थापक निधि सेमवाल हैं, जिन्होंने अमेरिका और स्विट्जरलैंड में सफल कॉर्पोरेट करियर के बाद अपनी जन्मभूमि उत्तराखंड लौटकर स्थानीय उत्पादों और संस्कृति को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। इस अभियान में सचिदानंद सेमवाल भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’ ने कहा कि ऐसे प्रयास न केवल स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि युवाओं को अपने राज्य के विकास से जुड़ने की प्रेरणा भी देते हैं। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में एक सराहनीय और प्रेरणादायक कदम बताया।

उत्तराखंड सूचना विभाग के निदेशक के.एस. चौहान ने कहा कि राज्य की असली ताकत उसके किसान, संस्कृति और स्थानीय उत्पाद हैं। उन्होंने कहा कि हिमालयन समूण कैफे जैसी पहलें उत्तराखंड के उत्पादों को नई पहचान देने के साथ-साथ राज्य की सकारात्मक ब्रांडिंग में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

कार्यक्रम में मौजूद पद्मश्री लोकगायक प्रीतम भरतवाण ने कहा कि “अपणी माटी, अपणी भाषा, अपणो खान-पान और अपणी संस्कृति ही हमारी सबसे बड़ी पहचान है।” उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसे प्रयास नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

इस अवसर पर निधि सेमवाल और सचिदानंद सेमवाल ने कहा कि यदि युवा बेहतर अवसरों की तलाश में पहाड़ छोड़ सकते हैं, तो कुछ लोगों को अवसर लेकर पहाड़ वापस भी आना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों, किसानों और संस्कृति को सशक्त बनाकर ही उत्तराखंड के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि हिमालयन समूण कैफे भविष्य में स्थानीय किसानों से सीधे खरीद, महिला स्वयं सहायता समूहों के सहयोग, पारंपरिक व्यंजनों के संरक्षण तथा उत्तराखंड के खाद्य उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए कार्य करेगा।

कार्यक्रम में समाजसेवी तथा विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। प्रमुख रूप से राकेश भट्ट, गजेन्द्र नौटियाल, अनिरुद्ध रैथवाण, नलानी गुसाईं, संजय कुमोला, राय सिंह रावत, अमेरिका से पधारे योगेश रामोला एवं लक्ष्मी रामोला सहित कई सम्मानित अतिथि उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे उत्तराखंड के किसानों, स्थानीय उत्पादों और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।