मसूरी/देहरादून। उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन भद्रराज मेला 2026 का रविवार को विधिवत शुभारंभ हो गया। मसूरी-देहरादून क्षेत्र की पहाड़ियों में स्थित प्रसिद्ध भद्रराज मंदिर में 15 से 17 अगस्त तक आयोजित होने वाले इस मेले को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
मेले के शुभारंभ की धार्मिक परंपरा के तहत सबसे पहले मटोगी गांव में पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद भद्रराज देवता की डोली को पारंपरिक रीति-रिवाजों और श्रद्धा के साथ भद्रराज मंदिर तक लाया गया। मंदिर पहुंचने पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए, जिसके बाद मेले का औपचारिक शुभारंभ हुआ।
भद्रराज मंदिर भगवान बलभद्र (बलराम) को समर्पित है और क्षेत्र में उन्हें भद्रराज देवता के रूप में पूजा जाता है। यह मंदिर पछवादून, जौनसार और आसपास के क्षेत्रों के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पर्वतीय रास्तों से पैदल यात्रा कर मंदिर पहुंचते हैं और भगवान भद्रराज के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं। भद्रराज मेले की विशेष पहचान यहां की धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता भी है।
ऐतिहासिक रूप से यह मेला हर वर्ष अगस्त में आयोजित होता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। पूर्व के आयोजनों में भी जौनसार, पछवादून, जौनपुर, मसूरी और देहरादून सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने का उल्लेख मिलता है।
15 से 17 अगस्त तक चलने वाले भद्रराज मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर परिसर में धार्मिक वातावरण के साथ स्थानीय संस्कृति की झलक भी देखने को मिलती है। इस दौरान भगवान भद्रराज के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना लगातार जारी रहेगा।
भद्रराज मेला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोक आस्था, परंपरा और पहाड़ी संस्कृति का जीवंत प्रतीक भी है। हर वर्ष की तरह इस बार भी मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

