गाँव की चौपाल से शिक्षा के गलियारों तक, लोक संस्कृति से सामाजिक चेतना तक—एक प्रेरक व्यक्तित्व
शिक्षा, समाज सेवा, तथा उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय सूर्य सिंह पंवार को उत्तराखण्ड विधानसभा की माननीय अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खंडूड़ी भूषण के कर-कमलों से प्रतिष्ठित ‘उत्तराखण्ड गौरव रत्न सम्मान 2024-25’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनकी 26 वर्षों की सतत शैक्षिक एवं सामाजिक यात्रा और समाज के प्रति उनके समर्पण का उल्लेखनीय प्रतिफल है।
पंवार पिछले 26 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। शिक्षण कार्य के साथ-साथ वे सामाजिक सरोकारों, पर्यावरण संरक्षण, पौधरोपण, बागवानी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जनजागरूकता के लिए भी निरंतर प्रयासरत हैं। विशेष रूप से फलदार एवं उपयोगी पौधों के वितरण, वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करने तथा उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति, परंपराओं और गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में उनके प्रयास सराहनीय रहे हैं।

सम्मान प्राप्त होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सूर्य सिंह पंवार ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए गौरव और आत्मिक संतोष का विषय है। वे इसे अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि न मानकर उन सभी सहयोगियों, शुभचिंतकों, गुरुजनों, मित्रों एवं समाज के लोगों के स्नेह, विश्वास और सहयोग का प्रतिफल मानते हैं, जिन्होंने उनकी सामाजिक एवं शैक्षिक यात्रा में निरंतर सहयोग दिया है।
उन्होंने कहा कि सम्मान केवल व्यक्ति की पहचान नहीं बढ़ाता, बल्कि समाज के प्रति उसके दायित्वों को भी और अधिक मजबूत करता है। यह सम्मान उन्हें शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, सामाजिक समस्याओं को प्रमुखता से उठाने, पर्यावरण संरक्षण एवं बागवानी को बढ़ावा देने और उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए और अधिक ऊर्जा एवं समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा देगा।

पंवार का मानना है कि किसी भी सम्मान की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब उसके माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा मिले। व्यक्ति की सबसे बड़ी उपलब्धि दूसरों के जीवन में बेहतर परिवर्तन लाने और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने में निहित है।
उन्होंने इस अवसर पर सभी शुभचिंतकों, मित्रों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज का स्नेह, विश्वास और आशीर्वाद ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। भविष्य में भी शिक्षा, समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण और लोक संस्कृति के संवर्धन के लिए उनका प्रयास निरंतर जारी रहेगा।
सम्मान से बढ़ा दायित्व, समाज सेवा का संकल्प और मजबूत हुआ।



