उपेंद्र सिंह रावत : Pahaadnews Team

आज में उत्तराखंड ने युवाओ की बात कर रहा हु वो आज किस दिशा में जा रहे है ये उनको भी नही पता, जहाँ एक ओर,दुसरे प्रदेशो के युवाओ के पास भविष्य की योजनाए है पर हमारे उत्तराखंड के युवा दिशाहीन है। इसका बड़ा कारण क्या है ? क्या कभी किसी ने जानने की कोशिश की ? नहीं !
इसका सबसे बड़ा कारण राजनीति है क्योकि युवाओ को लगता है राजनीति ही एक यैसा माध्यम है जिसमे की कम समय में काफी नाम औऱ शोहरत कमा सकते है, जबकि ये सोच बिलकुल गलत है ! यैसा क्यों सोचते है इसके पीछे भी बहुत बड़ा कारण है जिस तरह से देश की राजनीतिज्ञ लोगो की पास धन औऱ बल बढ़ा है उसका असर हमारे इन युवा पीढ़ी पर पड़ा रहा है। इसलिए आज की युवा पीढ़ी इस औऱ भाग रही है उनके पास धीरज की कमी है कम समय में आगे बढ़ना चाहते है। आज देखो बहुत सारे युवाओ का नौकरी से मोह भंग हो रहा है ओर राजनीती की ओर ज्यादा झुकाव हो रहा है उसका एक कारण धैर्य का न होना।

राजनीती में जाना बुरी बात नही है परन्तु अगर सभी लोग इस ओर भागेंगे तो प्रदेश का क्या हाल होगा ? मेने पिछले काफी समय से महसूस किया है की हमारे उत्तराखंड में भेड़चाल है सभी लोगो की एक जैसा काम करना है। यैसा नही है की हमारे उत्तराखंड में योग्यता की कमी, कमी तो उसको किस प्रकार से उपयोग करना है से सबसे बड़ी बात है। सरकारे योजना तो बनाते है पर उनको मुलभुत रूप से जमीन में नही उतारती बस फाइलो तक की सिमित रह जाती है।

अपने प्रदेश की युवा वर्ग का राजनीती को ओर रुख करना एक चिंता का विषय है। जिसके कारण उत्तराखंड में बहारी लोगो का बोल बाला ज्यादा होता जा रहा है। पहाड़ो में लगभग सारे व्यवसाय बहारी लोगो की हाथ में है, जो की आने वाले समय के लिए बहुत ही चिंताजनक स्थिति हो सकती है। पहाड़ो का भविष्य ओर सुरक्षा खतरे में है।

राजनीती में जाना बेरोजगारी भी एक बड़ा कारण हो सकता है । पर्यंटन की हिसाब से उत्तराखड में अपार सम्भावनाये है अगर उसको जमीनी स्तर पर काम किया जाय तो रोजगार को बढ़ाया जा सकता है। पिछले कुछ सालो में राजनितिक पार्टियों ने पार्टी में पद बढ़ाये उससे लगता है सारे बेरोजगारी ख़तम हो जाएगी जो की गलत है। आज सभी राजनितिक पार्टिया युवाओ का अपने अपने हिसाब से इस्तेमाल करती है।
ये उत्तराखंड की लिए एक गंभीर मुद्दा हो सकता है हमें इस बारे में सोचना है ।