चमोली , PAHAAD NEWS TEAM

जोशीमठ से करीब 80 किलोमीटर दूर नीती मलारी सीमा की ओर नीती गांव से डेढ़ किलोमीटर पहले धौली नदी पर झील बनने की खबर से एक बार फिर निचले इलाकों में रहने वाले लोग सहमे हुए हैं. झील क्षेत्र का निरीक्षण कर लौटे हिमालयी पारिस्थितिकी के विशेषज्ञ अतुल सती ने बताया कि यह कृत्रिम झील करीब 20 से 30 मीटर लंबी और 15 से 20 मीटर चौड़ी है.

उच्च हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक हलचल के बारे में जानने वाले अतुल सती का कहना है कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में ऐसी झील का बनना कोई विशेष आश्चर्य नहीं है। लेकिन यह झील नदी के प्रवाह के विपरीत बनी है। अगर झील बड़ा रूप लेती है तो यह टूट सकती है तो बड़ा खतरा हो सकता है।

सती ने बताया कि भारत-चीन सीमा पर भारत की सीमांत ग्राम नीति में झील बनने का कारण यह है कि सड़क निर्माण का मलब निर्धारित डंपिंग जोन में डाले जाने के बजाय सीधे धौली गंगा नदी के हवाले किया जा रहा है. इस झील के सामने नदी के रास्ते में बड़े-बड़े पत्थर और मलबा जमा हो गया है. जो लगातार नदी के पूरे प्रवाह को अवरुद्ध कर रहा है। जो थोड़ी सी बारिश में भी बड़े खतरे का कारण बन सकता है।

वहीं नन्दादेवी बायोस्फीयर संभागीय वनाधिकारी एनबी शर्मा ने बताया कि सड़क निर्माण का मलबा डम्पिंग जोन में डालने के बजाय नदी में डालने का मामला संज्ञान में आते हुए सड़क निर्माण एजेंसी पर ढाई लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया है. साथ ही नदी में फेंके जाने पर एक बार फिर संबंधित विभाग को नोटिस भेजा गया है.