मसूरी , PAHAAD NEWS TEAM

बीजेपी इस बार मसूरी विधानसभा से 21 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से जीतेगी. बीजेपी एक बार फिर जीत का झंडा लहराएगी. यह बात मसूरी विधायक और मौजूदा सरकार में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने शुक्रवार को नामांकन दाखिल करने के दौरान कही। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने जोशी के समर्थन में नारेबाजी की। उनके साथ भाजपा महानगर अध्यक्ष सीताराम भट्ट, मेयर सुनील उनियाल गामा, मंडल अध्यक्ष पूनम नोटियाल आदि मौजूद थे।

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी मसूरी विधानसभा सीट से विधायक हैं। मसूरी विधानसभा सीट का रोमांचक इतिहास रहा है। पिछले चार चुनावों में इस सीट पर दो बार कांग्रेस और दो बार बीजेपी का कब्जा रहा है. वर्ष 2000 में उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद 2002 के पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के कांग्रेस के जोत सिंह गुनसोला ने बीजेपी के नारायण सिंह को भारी अंतर से हराया था ।

साल 2007 में बीजेपी ने सहदेव सिंह पुंडीर को टिकट दिया था. दोनों पहाड़ी इलाकों से उम्मीदवार थे, जिसके बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला हुआ. आखिरी बाजी जोत सिंह गुनसोला ने मार ली । वर्ष 2008 में नए परिसीमन के बाद दून शहर का एक हिस्सा भी मसूरी सीट से जोड़ दिया गया। इससे इस सीट के भूगोल में पहाड़ और मैदान दोनों ही क्षेत्र आ गए । मसूरी सीट पर कैंट समेत कई वीवीआईपी इलाके हैं। साथ ही इस इलाके में 6 हजार फौजी परिवार हैं।

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की मजबूत पकड़

2012 के चुनाव में बीजेपी ने मसूरी विधानसभा सीट से गणेश जोशी को टिकट दिया था. वहीं, कांग्रेस ने अपने मौजूदा विधायक जोत सिंह गुनसोला पर ही दांव खेला। जनता ने गणेश जोशी पर भरोसा जताया और जोशी ने भारी मतों से जीत हासिल की। इसके बाद कांग्रेस से गोदावरी थापली ने 2017 में बीजेपी विधायक गणेश जोशी के सामने नामांकन दाखिल किया. मजबूत जनसंपर्क और नेतृत्व ने गणेश जोशी की बढ़त बनाए रखी और जोशी भारी मतों से जीत गए.
मसूरी विधानसभा सीट पर मतदाताओं की बात करें तो मसूरी विधानसभा में कुल मतदाताओं की संख्या 1 लाख 28 हजार 384 है. जिसमें पुरुष मतदाता 67 हजार 776 और महिला मतदाताओं की संख्या 60 हजार 608 है.

विधानसभा की पांच बड़ी समस्याएं

  1. ट्रैफिक जाम
  2. क्षेत्र के कई हिस्सों में पेयजल की समस्या
  3. स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव
  4. कई इलाकों में संपर्क मार्गों की खराब स्थिति
  5. सड़क और नाली की समस्या

मसूरी विधानसभा सीट पर गणेश जोशी की मजबूत पकड़ दिख रही है. यहां कांग्रेस का नेतृत्व लगातार कमजोर होता दिख रहा है. जोत सिंह गुनसोला के नेतृत्व में कांग्रेस को जो मजबूत पकड़ मिली थी, वह अब नहीं रही। कांग्रेस प्रत्याशी गोदावरी थापली , जो पिछले चुनाव में थी , क्षेत्र में सक्रिय हैं, लेकिन वह अपना जनाधार बढ़ाने में सफल नहीं दिख रही हैं। जातीय और क्षेत्रीय समीकरण भी जोशी के संतुलन को भारी बनाते दिख रहे हैं.

कैबिनेट में मंत्री पद से जोशी को सबसे बड़ा फायदा मिल सकता है। मंत्री बनने से उनका राजनीतिक कद बढ़ा है, वहीं विरोधियों को उन्हें हराने के लिए कोई बड़ा मुद्दा नजर नहीं आ रहा है. ऐसे में कांग्रेस के लिए राह मुश्किल नजर आ रही है. कांग्रेस को जमीन पर ज्यादा पसीना बहाना पड़ेगा।