देहरादून, PAHAAD NEWS TEAM
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को लेकर सर्द मौसम में भी सियासत गरमा गई है. चुनाव प्रचार के लिए अब प्रदेश में पार्टियों के स्टार प्रचारकों ने प्रचार शुरू कर दिया है. इसी कड़ी में विधानसभा चुनाव के समय तक आम आदमी पार्टी पूरी तरह टूटती नजर आ रही है. दरअसल अब तक पार्टी के कई नेता अपनी पार्टी छोड़ चुके हैं. आलम यह है कि देहरादून से लेकर सभी जिलों तक पार्टी के पदाधिकारी चुनाव तक भी पार्टी में बने रहने को तैयार नहीं हैं, वहीं जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, अब यह सूची काफी लंबी होती दिख रही है.
आम आदमी पार्टी के उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा के साथ ही राज्य में तीसरे विकल्प की संभावनाएं नजर आने लगी थीं. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के दौरे जैसे-जैसे उत्तराखंड में होते रहे, इन उम्मीदों को भी पंख लगने लगे। लेकिन राज्य में 2022 के विधानसभा चुनाव की लड़ाई से पहले आम आदमी पार्टी के जवानों ने मैदान छोड़ना शुरू कर दिया. आलम यह है कि अब तक पार्टी के करीब 50 नेता चुनाव से ठीक पहले पार्टी छोड़ चुके हैं.
बताया जा रहा है कि आम आदमी पार्टी द्वारा कर्नल अजय कोठियाल को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया, उसके बाद पार्टी के भीतर हंगामा मच गया और इस पद पर खुद को देखने वाले नेताओं ने पार्टी छोड़नी शुरू कर दी. इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी का साथ छोड़ चुके रविंद्र जुगरान का कहना है कि जिस तरह आम आदमी पार्टी ने मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया, इस रेस में दौड़ रहे बाकी घोड़ों की उम्मीदें खत्म हो गईं. जहां वे खुद को उनसे से बेहतर मानते रहे, इतना ही नहीं पार्टी के भीतर जिस लोकतंत्र की चर्चा होती है, वह भी नजर नहीं आयी . उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के नेता दिल्ली के इशारे पर चलते रहे और इसलिए नेता पार्टी छोड़ रहे हैं.
आम आदमी पार्टी जिस तरह टूट हुई है, सबसे ज्यादा खुशी कांग्रेस में ही दिख रही है। दरअसल, माना जा रहा था कि उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी के आने के बाद सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को होगा। इसलिए, अब आम आदमी पार्टी में भगदड़ मच गई है, इसलिए कांग्रेस नेता आम आदमी पार्टी पर जमकर बवाल के साथ बयानबाजी कर रहे हैं। कांग्रेस प्रदेश महासचिव मथुरा दत्त जोशी ने कहा कि ऐसी पार्टियां जो राज्य में आती हैं, कई सपने दिखाती हैं और दावा करती हैं, लेकिन हकीकत में उनका कोई अस्तित्व नहीं है. उत्तराखंड में जो हश्र आम आदमी पार्टी का हुआ है, वह उनकी उत्तराखंड चुनाव लड़ने की इच्छा के साथ ही जग जाहिर हो गया था.
इस मामले में हम भी आम आदमी पार्टी का पक्ष चाहते थे और पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता उमा सिसोदिया से इस बारे में बात करने की कोशिश की, लेकिन पार्टी के अंदर ऐसा क्यों हो रहा है और अचानक भगदड़ क्यों हो रही है? इसका जवाब उनके पास भी नहीं दिखाई दिया. शायद इसलिए उन्होंने इस मामले पर जवाब देना सही नहीं समझा . बहरहाल, जो भी हो, यह तय है कि चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी को जो झटके लग रहे हैं, वह पार्टी को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

