रुद्रप्रयाग , PAHAAD NEWS TEAM
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव के नतीजे इस बार चौकाने वाले हो सकते हैं, क्योंकि कोई भी राजनीतिक विश्लेषक इस बार के चुनाव नतीजों पर सटीक जवाब नहीं दे पा रहे है. तमाम राजनीतिक विश्लेषकों ने चुप्पी साध रखी है. ऐसे में रिजल्ट को लेकर भी असमंजस की स्थिति है.
उत्तराखंड में पांचवीं विधानसभा का चुनाव 14 फरवरी को हुआ है, जिसके नतीजे 10 मार्च को आएंगे, लेकिन इस बार मतगणना से पहले चुनाव परिणामों की स्थिति स्पष्ट नहीं है. रुद्रप्रयाग जिले में दो विधानसभा सीटें हैं, जिनमें केदारनाथ और रुद्रप्रयाग शामिल हैं। इन दोनों सीटों पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. विधानसभा सीटों को लेकर राजनीतिक विश्लेषक सटीक जवाब नहीं दे पा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषक श्याम लाल सुंदरियाल, जिला प्रेस क्लब के अध्यक्ष बृजेश भट्ट एवं युवा पत्रकार विनय बहुगुणा का कहना है कि इस चुनाव में लोगों ने मोदी के नाम पर वोट किया है. जनता भाजपा उम्मीदवारों के काम से संतुष्ट नहीं थी, लेकिन आखिरी दिनों में मोदी ने जादू का काम किया, लेकिन कितना काम किया, यह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में दोनों सीटों पर स्थिति गंभीर बनी हुई है.
केदारनाथ विधानसभा में मुकाबला भाजपा-कांग्रेस के साथ निर्दलीय बना हुआ है। यहां स्पष्ट त्रिकोणीय मुकाबला था। निर्दलीय कुलदीप रावत सात साल से जनता के बीच हैं और लगातार जनता के लिए काम कर रहे हैं. ऐसे में उन्हें इस बार जनता का आशीर्वाद मिल सकता है.
रुद्रप्रयाग विधानसभा सीट की बात करें तो इस सीट पर भाजपा-कांग्रेस के साथ ही निर्दलीय उम्मीदवार पूर्व मंत्री मातबर सिंह कंडारी और उक्रांद युवा प्रत्याशी मोहित डिमरी के बीच कड़ा मुकाबला है. यूकेडी के निर्दलीय कंडारी और मोहित कितने वोटों को आकर्षित कर पाए, यह स्पष्ट नहीं है, जिससे यहां भी स्थिति जटिल बनी हुई है।


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