मसूरी, PAHAAD NEWS TEAM

चुनावी थकान के बाद विभिन्न दलों के प्रत्याशी व कार्यकर्ता अपने घरों में आराम कर रहे हैं और 10 मार्च को चुनाव परिणाम का इंतजार कर रहे हैं. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों ने खेती का काम शुरू कर दिया है. चंबा-मसूरी फल पट्टी पर पड़ने वाले गांवों में इन दिनों मटर की बुआई चल रही है. यहां मटर देहरादून, मसूरी समेत कई जगहों पर बिक्री के लिए जाती हैं।

पिछले महीनों में हुई अच्छी बारिश और बर्फबारी के बाद चंबा-मसूरी मार्ग के किनारे पड़ने वाले गांवों के ग्रामीण इन दिनों अपने खेतों में बड़े पैमाने पर मटर की बुआई में लगे हैं. करीब ढाई महीने बाद मटर की यह फसल तैयार हो जाएगी। जिसे देहरादून, मसूरी, चंबा समेत अन्य इलाकों में बेचा जाएगा। चंबा क्षेत्र के ऊंचाई वाले स्थानों पर पड़ने वाले सौड़, जड़ीपानी, काणाताल, ठांगधार, रौतूकीबेली सहित क्षेत्र के अन्य गांवों में मटर की बुआई के साथ आलू की फसल के लिये खेतों को तैयार किया जा रहा है। सौड़, ठंगधार तथा जड़ीपानी गांव के काश्तकार धीरचंद रमोला, वीरचंद रमोला, अजय चंद रमोला, कुलवीर चंद रमोला, दलेब चंद रमोला आदि का कहना है कि इस क्षेत्र के खेतों की मिट्टी नकदी फसलों के लिए उपयुक्त है, नकदी फसलों का अच्छा उत्पादन होता है. यही कारण है कि यहां के किसान मटर, आलू, गोभी सहित अधिक ऊंचाई पर उगाई जाने वाली सब्जियों का उत्पादन करते हैं। खेत के मटर अधिक स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिक भी होते हैं, इसके लिए किसान पुराने गोबर को खाद के रूप में प्रयोग करते हैं। मटर के पौधों की समय-समय पर देखभाल करना आवश्यक है। सबसे अधिक समस्या अप्रैल के महीने में होती है, जब ओले गिरने की संभावना होती है, इस दौरान मटर के पौधे पर फली रह जाती है, ओला गिरने से मटर की फसल खराब होने की संभावना अधिक होती है। किसानों को बाजार से मटर का बीज लाना पड़ता है, करीब 15 किलो मटर के बीज दो हजार रुपये में मिल रहे हैं. कहा कि समय-समय पर अच्छी बारिश हुई तो मटर की बंपर फसल हो सकती है, जिससे किसानों को अच्छी आमदनी होगी. इसके साथ ही आलू की फसल भी अगले 15 से 20 दिनों में बो दी जाएगी। जिसके लिए अभी से खेतों को तैयार करने का काम किया जा रहा है.