चंपावत , PAHAAD NEWS TEAM
यहां पाटी विकासखंड के सबसे ज्यादा छात्र-छात्राओं वाले श्री सिद्ध राजकीय इंटर कॉलेज रिठाखाल में पढ़ने वाले छात्र एवं छात्राओं का भविष्य खतरे में है. यहां स्थिति यह है कि न तो पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक हैं और न ही स्कूल में स्टाफ है। आलम यह है कि प्रिंसिपल को इंटरवल और छुट्टी की घंटी बजानी पड़ती है। चतुर्थ श्रेणी स्टाफ की गैरमौजूदगी में अब स्कूल के प्राचार्य को मजबूरी में यह काम करना पड़ रहा है। बता दें कि 447 छात्रों के साथ 236 छात्राएं भी स्कूल में पढ़ रही हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि स्कूल में कई महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई और उनका भविष्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. भगवान का भरोसा है। है। स्कूल की बदहाली को लेकर अभिभावकों में भी जोरदार विरोध है। इस कॉलेज में दूर-दूर से कई बच्चे कई कठिनाइयों का सामना करने के बाद शिक्षा के लिए आते हैं, लेकिन स्कूल में उनके लिए पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं।
स्थाई शिक्षक के नाम पर स्कूल में केवल अंग्रेजी प्रवक्ता ही हैं, जिन्हें प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इतिहास और अर्थशास्त्र विषय के केवल दो अतिथि शिक्षक हैं। इंटर कक्षाओं में संस्कृत विषय के 118 छात्र हैं लेकिन संस्कृत विषय के शिक्षक का पद रिक्त है। हाई स्कूल में विज्ञान और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के पद भी लंबे समय से खाली पड़े हैं। स्कूल में फर्नीचर होने के बावजूद छात्रों को फर्श पर बैठना पड़ रहा है। प्रभारी प्राचार्य प्रदीप बिष्ट ने बताया कि ग्यारहवीं कक्षा के कक्षा कक्ष में 79 विद्यार्थी हैं। उन्हें एक जगह बैठाना मुश्किल हो रहा है। तो 12वीं कक्षा में 82 लड़के और लड़कियां हैं, एक कक्षा में केवल 50 बच्चों को बैठाया जा सकता है। ऐसे में एक ही स्कूल में चतुर्थ श्रेणी व सफाई कर्मचारी का पद भी लंबे समय से खाली पड़ा है, जिसके चलते सुबह की प्रार्थना से लेकर शाम तक केवल प्राचार्य व शिक्षकों को ही छुट्टी की घंटी बजानी पड़ती है. विद्यालय में साफ-सफाई का उचित प्रबंध नहीं है।कॉलेज में कक्षाओं के उचित प्रबंधन के लिए कम से कम 9 शिक्षकों की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों की ओर से शिक्षकों व चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की तैनाती के साथ-साथ कक्षाओं का विस्तार करने की मांग की जा रही है, लेकिन उनकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. अभिभावकों ने बताया है कि पूरे क्षेत्र की आबादी 30 हजार से अधिक है और यह इकलौता इंटर कॉलेज है, जिसके कारण दर्जनों दूर-दराज के गांवों से छात्र यहां पढ़ने आते हैं, लेकिन यहां उनकी शिक्षा और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. . शिक्षकों की कमी के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं मुख्य शिक्षा अधिकारी अरविंद गौड़ का कहना है कि कई विद्यालयों में शिक्षकों व प्राचार्यों के पद रिक्त हैं और रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए विभाग को पत्र लिखा गया है और जल्द ही रिमाइंडर पत्र भी भेजा जाएगा और इस पर कार्यवाही की जाएगी ।


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