मसूरी, PAHAAD NEWS TEAM
क्यारकुली की ग्रामीण महिलाएं, ग्राम प्रधान कौशल्या रावत के साथ, मिथुन चक्रवर्ती और अनुपम खेर अभिनीत और विवेक अग्निहोत्री द्वारा निर्देशित फिल्म द कश्मीर फाइल्स देखने आईं और फिल्म देखते हुए कश्मीरी पंडितों पर हो रहे अत्याचारों पर भावुक हो गईं। वहीं बीच में भारत माता की जय के नारे भी लगे।
विवेक रंजन अग्निहोत्री ने ट्विटर पर क्यारकुली की ग्राम प्रधान कौशल्या रावत की तारीफ की है और उन्होने ट्वीट में ये लिखा यह क्या है, क्यों है, इसे वो ही समझ सकता है जिसे मानवता पे आस्था है। यह एक स्वर्ण काल है। यह एक नया भारत है।
यह क्या है, क्यों है, इसे वो ही समझ सकता है जिसे मानवता पे आस्था है।
— Vivek Ranjan Agnihotri (@vivekagnihotri) March 25, 2022
यह एक स्वर्ण काल है। यह एक नया भारत है। #TheKashmirFiles pic.twitter.com/mZiiYDgoj9
ग्राम प्रधान कौशल्या रावत ने कहा कि द कश्मीर फाइल्स फिल्म की चर्चा के बाद उन्होंने अपने ग्राम सभा की महिलाओं को आमंत्रित किया और लगभग 120 महिलाएं फिल्म देखने आई और जब सिनेमा घर का हाउस फुल होने पर महिलाओं ने सीट न मिलने पर हाल की सीढ़ियों पर बैठ कर फिल्म देखी । उन्होंने बताया कि इस फिल्म को दिखाने के लिए उन्होंने अपने ग्राम प्रधान के वेतन से भुगतान किया। ताकि सभी महिलाएं इस लोकप्रिय फिल्म को देख सकें।
कश्मीर में कश्मीरी पंडितों पर हो रहे अत्याचार पर बनी फिल्म द कश्मीर फाइल्स की चर्चा सुनने के बाद ग्राम प्रधान कौशल्या रावत गांव भटटा क्याकुली की करीब 120 महिलाओं के साथ फिल्म देखने पहुंचीं. फिल्म देखते हुए कश्मीरी पंडितों पर हो रहे अत्याचारों को देख महिलाओं की आंखों से आंसू छलक पड़े. ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि इस फिल्म को देखने से पता चला कि किस तरह से आतंकियों ने कश्मीर में हिंदू कश्मीरी पंडितों को परेशान किया और उनके साथ किस तरह की भीषण घटनाएं हुईं. फिल्म के दौरान सिनेमा हॉल में भारत माता की जय के नारे लगते रहे। ग्रामीण महिलाओं के साथ-साथ भाजपा मसूरी मंडल के अध्यक्ष मोहन पेटवाल ने भी फिल्म देखी और कहा कि आज तक जो कश्मीर छिपा था, वह अब सामने आ गया है और देशवासियों को अब पता चल गया है कि कश्मीर में आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों के साथ किस तरह जुल्म किया. क्या यह फिल्म हर भारतीय को देखनी चाहिए ताकि वह समझ सके कि कैसे आतंक का माहौल था लेकिन अब केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 और 35A को हटा दिया है और आने वाले समय में कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास किया जाएगा और शांति कायम होगी। फिल्म के अंत में ग्राम प्रधान कौशल्या रावत ने कहा कि द कश्मीर फाइल्स फिल्म की चर्चा के बाद उन्होंने अपने ग्राम सभा की महिलाओं को आमंत्रित किया और लगभग 120 महिलाएं फिल्म देखने आई और जब सिनेमा घर का हाउस फुल होने पर महिलाओं ने सीट न मिलने पर हाल की सीढ़ियों पर बैठ कर फिल्म देखी । उन्होंने बताया कि इस फिल्म को दिखाने के लिए उन्होंने अपने ग्राम प्रधान के वेतन से भुगतान किया। ताकि सभी महिलाएं इस लोकप्रिय फिल्म को देख सकें। उन्होंने कहा कि 30 साल पहले जिस तरह से कश्मीर में महिलाओं के साथ बर्बरता की गई और इस सच्चाई को छुपाया गया वह बेहद निंदनीय है. उन्होंने उम्मीद जताई कि कश्मीरी पंडित कश्मीर लौट आएंगे और जिस तरह से महिलाओं को सशक्त बनाया गया है वह काबिले तारीफ है। उन्होंने कहा कि अब कश्मीर में धारा 370 हटा दी गई है, जिससे अब वहां शांति लौटेगी और कश्मीरी पंडित वापस चले जाएंगे. फिल्म में छोटी सी भूमिका निभाने वाली ग्रामीण महिला ज्योति ने कहा कि उन्हें पता नहीं था कि वहां इतना अत्याचार हुआ है यहां तक कि कश्मीरी पंडितों का राशन भी नहीं दिया जाता था। वहीं ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता राकेश रावत ने कहा कि यह हमारे भारत का इतिहास है जो छुपाया गया और महिलाओं को अवश्य दिखाना चाहिए , इसलिए इस फिल्म को सामूहिक रूप से पूरे ग्राम पंचायत की महिलाओं को दिखाया गया. उन्होंने बताया कि ऐसी कई महिलाएं हैं जिन्होंने आज तक थिएटर नहीं देखा, उन्होंने द कश्मीर फाइल्स फिल्म भी देखी। मालूम हो कि फिल्म की ज्यादातर शूटिंग मसूरी और आसपास के इलाकों में हुई है और लाइब्रेरी चौक को लाल चौक के तौर पर दिखाया गया है, इस फिल्म को न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में सराहा जा रहा है. यह फिल्म सभी को देखनी चाहिए ताकि कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के साथ हुई क्रूरता को समझा जा सके. द रिटज सिनेमा के प्रबंधक अरुण पाल ने कहा कि इस फिल्म को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय नागरिक मसूरी आ रहे हैं, इतनी फिल्में देखने पहले कभी नहीं आए, लगातार हाउस फुल चल रहा है, जबकि राज्य सरकार ने इसे टैक्स फ्री कर दिया है। उन्होंने बताया कि वह पांच साल से काम कर रहे हैं जिसमें पहली बार इस फिल्म को देखने बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं और दो शो चलाये और सिनेमा घर हाउस फुल रहा .

