रुद्रप्रयाग : धनपुर पट्टी के पीड़ा गांव में गुलदार का दहशत है. रात होते ही गुलदार गौशाला में घुसकर मवेशियों को अपना निवाला बना रहा है, जिससे ग्रामीणों की रोजी-रोटी का नुकसान हो रहा है. वन विभाग ग्रामीणों की समस्या को समझने को भी तैयार नहीं है। ग्रामीण लंबे समय से गुलदार के आतंक से निजात दिलाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है. ऐसे में अब ग्रामीणों को अपनी जान का भी डर सता रहा है.
आपको बता दें कि धनपुर क्षेत्र के पीड़ा गांव में गुलदार का दहशत कई वर्षों से कायम है. इसके साथ ही भालू के आतंक से ग्रामीण भी सहमे हुए हैं। भालू आए दिन ग्रामीणों की फसल को नुकसान पहुंचा रहा है तो गुलदार रात के समय गौशाला का दरवाजा तोड़कर मवेशियों को निवाला बनाने में लगा है. बीती रात गुलदार ने पीड गांव में ग्रामीण हरीश सिंह के पुत्र मातबर सिंह की गौशाला का दरवाजा तोड़कर एक दर्जन भेड़-बकरियों को अपना निवाला बना लिया. गुलदार के आतंक से ग्रामीण परेशान हैं। एक ओर जहां भालू फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है वहीं गुलदार मवेशियों को निवाला बनाकर उनकी अर्थव्यवस्था के साधन नष्ट कर रहा है.
ग्राम प्रधान अर्जुन सिंह नेगी व समाजसेवी राकेश मोहन ने बताया कि पिछले काफी समय से पीड़ा गांव में भालू और गुलदार का आतंक है. जिला प्रशासन और वन विभाग को लिखित और मौखिक रूप से सूचित करने के बाद भी आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि न तो ग्रामीणों को गुलदार के आतंक से मुक्ति मिल रही है और न ही भालू का खौफ कम हो रहा है. ऐसे में ग्रामीण काफी डरे हुए हैं. गुलदार के आतंक से महिलाएं घास काटने नहीं जा रही हैं, वहीं स्कूली बच्चे भी स्कूल जाने से कतरा रहे हैं. ग्रामीणों को अपने पाल्यों की चिंता सता रही है।
समाजसेवी राकेश मोहन ने कहा कि वन विभाग की लापरवाही से ग्रामीणों के मवेशी सुरक्षित नहीं हैं. ग्रामीणों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के मवेशी गुलदार के शिकार हो रहे हैं और वन विभाग की टीम गांव पहुंचकर पंचनामा कर रही है, लेकिन कई वर्षों के बाद भी प्रभावितों को मुआवजा नहीं मिल रहा है. ऐसे में ग्रामीण काफी परेशान हैं. उन्होंने वन विभाग से प्रभावित ग्रामीणों को तत्काल मुआवजा देने, साथ ही क्षेत्रवासियों को गुलदार के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है.


Recent Comments