देहरादून : गुरुवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जीएमएस रोड स्थित वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी में फेडरेशन ऑफ इंडियन जियो साइंसेज एसोसिएशन के तृतीय त्रैवार्षिक सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. सम्मेलन ‘सतत विकास के लिए हिमालयी भूविज्ञान’ पर आधारित है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सतत विकास के लिए फेडरेशन ऑफ इंडियन जियोसाइंसेस एसोसिएशन के भविष्य के प्रयासों पर आधारित पुस्तक और वाडिया संस्थान के निदेशक डॉ कालाचंद साई द्वारा लिखित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऑफ जियोसाइंटिस्ट पुस्तक का विमोचन भी किया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि में आयोजित हो रहे इस सम्मेलन में देश भर के वैज्ञानिक जुटे हैं. उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस सम्मेलन में विचार-मंथन से समाज कल्याण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को अवश्य ही अमृत की प्राप्ति होगी। उन्होंने कहा कि हिमालय और इसका भूवैज्ञानिक महत्व देश और दुनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

इसका गहराई से अध्ययन किया जाए तो हम पाते हैं कि हिमालय का भूविज्ञान भी हमारे विकास का एक सतत माध्यम है। उत्तराखण्ड प्राकृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है। हमारी प्राकृतिक संपदा और जैव विविधता पूरे देश और दुनिया में अद्वितीय है। इन सभी के साथ-साथ हिमालय हमारे राज्य की शोभा बढ़ा रहा है, देश की जलवायु की गुणवत्ता में सुधार लाने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में हिमालय का विशेष महत्व है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए काम कर रही है. जल विद्युत की दृष्टि से हिमालय हमारे लिए विशेष महत्व रखता है। उत्तराखंड में जल विद्युत और पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक आपदाओं और भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जान-माल की हानि को कम करने के लिए क्या प्रभावी प्रयास किए जा सकते हैं,
इस विषय पर भी इस सम्मेलन में चर्चा अवश्य की जानी चाहिए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि हिमालय पर्वत के भूविज्ञान को समझने और हिमालय के आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लाभ के लिए अनुसंधान को बढ़ावा देकर प्राकृतिक खतरों को कम करने के लिए वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी इसी तरह काम करना जारी रखेगी।
इस मौके पर फेडरेशन ऑफ इंडियन जियोसाइंसेस एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो.वी.पी. डिमरी, वाडिया संस्थान के निदेशक डॉ. कालाचंद सांई सहित देश भर के वैज्ञानिक मौजूद थे।

