देहरादून : उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के पीआरओ कृष्ण मोहन ने हाल ही में एक मामले को लेकर डालनवाला थाने में मुकदमा दर्ज कराया था, जिस पर सरकार ने जांच के बाद आरोपियों को बरी कर दिया है. मामला बिना कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज की अनुमति के अयाज अहमद को पीडब्ल्यूडी प्रमुख के पद पर पदोन्नत करने से जुड़ा है.
हाल ही में डालनवाला थाने में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के पीआरओ कृष्ण मोहन ने सतपाल महाराज के तत्कालीन निजी सचिव आरपी सिंह व पदोन्नत होने वाले अयाज अहमद के खिलाफ उस पुराने मामले में मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें अयाज अहमद को पदोन्नति देकर पदोन्नत किया गया था. पीडब्ल्यूडी प्रमुख के रूप में कैबिनेट। बिना मंत्री की स्वीकृति के मुख्यमंत्री को ऑनलाइन पत्र भेजा गया।

आरोप है कि इस मामले में पीडब्ल्यूडी मंत्री सतपाल महाराज से मंजूरी नहीं ली गई और यह फाइल फर्जी डिजिटल हस्ताक्षर से ऑनलाइन मुख्यमंत्री को भेज दी गई. अब यह मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि सरकार का 27 जुलाई 2022 का वह पत्र अब सामने आया है, जिसमें अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने तत्कालीन निजी सचिव आईपी सिंह को इससे संबंधित जांच रिपोर्ट में दोषी नहीं ठहराए जाने की जानकारी दी थी ।
जाहिर है कि कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज को भी 5 माह पहले अपर सचिव के स्तर पर फर्जी डिजिटल सिग्नेचर की जांच रिपोर्ट मिली है और अपर सचिव के जांच में बरी होने की जानकारी सतपाल महाराज को भी है. लेकिन बावजूद इसके 5 महीने बाद सतपाल महाराज के पीआरओ आईपी सिंह और पीडब्ल्यूडी प्रमुख अयाज अहमद के खिलाफ इसी मामले में केस कर देते हैं। जाहिर है कि यह सरकार के स्तर पर की गई जांच पर मंत्री और उनके कर्मचारियों के विश्वास की कमी को दर्शाता है।
हालांकि इस मामले पर फिलहाल कोई भी कुछ भी कहने से परहेज नहीं कर रहा है और इस संबंध में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज से भी संपर्क नहीं हो पाया है. लेकिन साफ है कि सतपाल महाराज के लिए भी यह मुद्दा काफी अहम है और केस दर्ज करने से साफ है कि वे इसे गंभीरता से ले रहे हैं.

