मसूरी : देश-विदेश के विभिन्न विधाओं के प्रख्यात ज्योतिषियों ने फरीदाबाद ज्योतिष संघ के तत्वावधान में चल रहे एशियन एस्ट्रो मीट में मानव जीवन पर ग्रहों के प्रभाव पर विचार-विमर्श किया।

इस अवसर पर अध्यात्म ज्योतिष के विद्वान आचार्य जितेंद्र शर्मा ने कहा कि अध्यात्म जो सनातन धर्म की मूल संस्कृति है उसे आगे बढ़ाना चाहिए जिसे लोग आज भूलते जा रहे हैं। हमें अध्यात्म के मूल तत्वों की ओर जाना होगा और इसकी शुरुआत अपने घर से करनी होगी, इसके लिए हमें शैली और भाषा के आधार पर अपने जीवन की शुरुआत करनी होगी।

ज्योतिष गुरु भवन दीवान विश्वकर्मा ने कहा कि यह मुलाकात बहुत महत्वपूर्ण है जिसमें विभिन्न विधाओं के ज्योतिषी आए हैं और वे अपने स्तर पर ज्योतिष पर विचार कर रहे हैं। इस ज्योतिष महाकुंभ में देश-विदेश से न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ, कर्मकांड विशेषज्ञ, टैरो विशेषज्ञ, ज्योतिषी आए हैं। जिस प्रकार एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की एक बिरादरी होती है, उसी प्रकार ज्योतिष में भी एक बिरादरी होती है, जिसके भीतर अध्यात्म और सनातन संस्कृति का प्रसार कर ज्योतिष के बारे में फैली भ्रांतियों को दूर किया जाता है। और सही तरीके से इन साधनों का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि वास्तु शास्त्र का हमारे जीवन में उतना ही महत्व है जितना कि भोजन का।

उसे मानना ​​चाहिए ताकि उसे जीवन में अमल में लाया जाए, नहीं तो जीवन के सारे सुख समाप्त हो जाते हैं। डॉ. शालिनी ने बताया कि वह वास्तु और एनर्जी साइंस पर काम करती हैं। उन्होंने कहा कि वे मौजूदा तकनीक को अपना रहे हैं जो वास्तु के हिसाब से सही नहीं है। उन्होंने कहा कि आज वर्क फार्म होम की नई व्यवस्था है और वह अपने ऑफिस को अपने घर ले आए हैं और इलेक्ट्रॉनिक चीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे घर की सकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो रही है और नकारात्मक ऊर्जा घर में जा रही है. जिससे परिवार में परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। कि यह केतु के अंतर्गत आता है।

डॉ. सुमन कोहली ने बताया कि वह ज्योतिष भी पढ़ाती हैं। जब लोगों को इसकी जानकारी नहीं थी, तब लोग बीमार नहीं पड़ते थे, लेकिन आज घर बहुमंजिला हो गए हैं, जिससे सकारात्मक ऊर्जा खत्म होती जा रही है, वहीं लोग सजावट के लिए तरह-तरह के प्रयोग कर रहे हैं, जिससे परेशानी बढ़ रही है. घरों में शयन कक्ष के साथ-साथ शौचालय बना दिये गये हैं, रसोई के साथ-साथ बर्तन धोने की व्यवस्था कर दी गयी है, जिससे घरों में विवाद बढ़ गये हैं. पहले परिवार एक साथ रहते थे, तब सभी के ग्रह एक दूसरे की सहायता करते थे, लेकिन आज एकल परिवार होने से परिवार के अन्य सदस्यों के ग्रहों से लाभ नहीं होता है।

आचार्य सुब्रहमनीन कृष्णा स्वामी ने कहा कि वे हीलिंग और रेकी आदि से जुड़े हुए हैं, यहां उन्हें ज्योतिष के विभिन्न रूपों पर चर्चा करने का अवसर मिला। नलिनी त्रिखा तनेजा ने कहा कि वह अध्यात्म पर काम करती हैं और ध्यान लगाने वालों के साथ लोगों का व्यवहार करती हैं। और कई परिवारों को टूटने से बचाया और जो बच्चे डिप्रेशन में हैं उन्हें मेडिटेशन से ठीक किया है।

आचार्य अमित मुद्गल ने कहा कि वे वैदिक और लाल किताब से काम करते हैं। यहाँ अनेक विद्वानों के माध्यम से ज्योतिष की धाराएँ प्रवाहित हो रही हैं और वाद-विवाद हो रहे हैं। इस अवसर पर आचार्य शंभुनाथ ने कहा कि संकल्प के बिना कोई भी कार्य सफल नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि ज्योतिष किसी का भाग्य नहीं बदल सकता, वह उसे ज्ञान दे सकता है, उसके रास्ते में आने वाले ग्रहों की दशा सुधार सकता है।

इस पर श्रीलंका से डा. रंजीथ ओपाथा, राज शर्मा, सुहास डोगरी, डा. ललिता कश्यप, इंद्र कश्यप,सुरिंदर कपूर, डा. बाल्मीकि प्रसाद, डा. जसविंदर कौर, राशी साहनी शर्मा, संजय नंदा, सुमित अरोरा, बोमिन सिंह, कमल किशोर वर्मा, शैफाली, कीर्ति कुमार, अमित मुदगल, अनिल झांब, शैलंेद्र गर्ग, विपिन अरोरा, त्रिप्ता अरोरा, दिनेश शर्मा, जीडी दयाल, प्रभजोत कौर, अशोक कुमार, साक्षी भार्गव, दिव्या ठाकुरी, डा. चक्र, प्रभाकर हरीश, कल्पला शर्मा, कविता वशिष्ठ, नलिनी त्रिखात तनेजा, नीतू मिश्रा, गौरव शर्मा आदि मौजूद रहे।