देहरादून 25 दिसम्बर 2022 : श्री श्रद्धानंद बाल वनिता आश्रम और आर्य समाज धामावाला देहरादून की ओर से स्वामी श्रद्धानन्द जी का बलिदान दिवस मनाया गया। इस मौके पर कैबिनेट मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस दौरान सरकार द्वारा धर्मांतरण पर सख्त कानून बनाने पर मंत्री डॉ अग्रवाल का आभार प्रकट किया गया।

रविवार को तिलक रोड देहरादून स्थित आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री डॉ अग्रवाल ने कहा कि एडवोकेट मुंशीराम से स्वामी श्रद्धानंद तक की जीवन यात्रा प्रत्येक व्यक्ति के लिए बेहद प्रेरणादायी है। वे हिन्दी को राष्ट्र भाषा और देवनागरी को राष्ट्र-लिपि के रूप में अपनाने के पक्षधर थे।

डॉ अग्रवाल ने कहा कि स्वामी श्रद्धानन्द का विचार था कि अज्ञान, स्वार्थ व प्रलोभन के कारण धर्मांतरण कर बिछुड़े स्वजनों की शुद्धि करना देश को मजबूत करने के लिए परम आवश्यक है। इसीलिए, स्वामी जी ने भारतीय हिन्दू शुद्धि सभा की स्थापना कर दो लाख से अधिक मलकानों को शुद्ध किया।

डॉ अग्रवाल ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद जी चाहते थे कि राष्ट्र धर्म को बढ़ाने के लिए, प्रत्येक नगर में एक ‘हिन्दू-राष्ट्र मंदिर’ होना चाहिए। जिसमें 25 हजार व्यक्ति एक साथ बैठ सकें। वहां वेद, उपनिषद, गीता, रामायण, महाभारत आदि का पाठ हुआ करे। मंदिरों में अखाड़े भी हों जहां, व्यायाम द्वारा शारीरिक शक्ति भी बढ़ाई जाएं प्रत्येक हिन्दू राष्ट्र मंदिर पर गायत्री मंत्र भी अंकित हो।

मंत्री डॉ अग्रवाल ने कहा कि स्वामी श्रद्धानन्द जी द्वारा प्रारम्भ किये गए हिन्दुओं को स्वधर्म में वापस लाने के सफलतापूर्ण शुद्धि आंदोलन अभियान से नाराज़ अब्दुल रसीद कट्टरपंथी ने दिनांक 23 दिसम्बर 1926 को गोली मारकर उनकी हत्या कर दी।

इस मौके पर सोहन पाल सिंह, निकिता आर्य, दयानंद तिवारी, ज्ञान चंद गुप्ता, सुधीर गुलाटी, धीरेंद्र मोहन सचदेवा, स्नेहलता खट्टर, ओपी नागिया, डीपी गोयल, नारायण दत्त, नवीन भट्ट आदि उपस्थित रहे।

बाल वनिता और आर्य समाज की थी स्थापना

देहरादून: डॉ अग्रवाल ने बताया कि निराश्रित बालक-बालिकाओं हेतु श्री श्रद्धानन्द बाल वनिता आश्रम की स्थापना, आर्य समाज धामावाला की प्रबंधकारिणी द्वारा 17 फरवरी 1924 को की गई। आश्रम के भवन का शिलान्यास राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी के कर कमलों द्वारा किया गया। आश्रम का संचालन, महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती जी की प्रेरणा से 29 जून 1879 ईस्वी में स्थापित, आर्य समाज धामावाला उत्तराखंड प्रदेश की सर्वप्रथम समाज की प्रबंधकारिणी द्वारा किया जाता है।