सहारनपुर , पहाड़ न्यूज़

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी उनके निधन पर दुख और संवेदनाएं व्‍यक्‍त की हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां हीराबेन (हीराबेन मोदी) नहीं रहीं। यह जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से शुक्रवार सुबह दी गई। पोस्ट में लिखा था, भगवान के चरणों में एक शानदार सदी का अंत… मैंने हमेशा अपनी मां में उस त्रिमूर्ति को महसूस किया है। इसमें एक तपस्वी की यात्रा शामिल है जो एक निस्वार्थ कर्म योगी और मूल्यों के लिए प्रतिबद्ध जीवन का प्रतीक है। जब मैं उनके 100वें जन्मदिन पर उनसे मिला, तो उन्होंने एक बात कही, जो हमेशा याद रखी जाती है, समझदारी से काम करो और पवित्र रहो। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी उनके निधन पर दुख और संवेदनाएं व्‍यक्‍त की हैं।

जानकारी के मुताबिक 100 वर्षीय हीराबा का आज सुबह निधन हो गया। यूएन मेहता अस्पताल के एक बयान में कहा गया है, “हीराबा मोदी का शुक्रवार (30 दिसंबर) तड़के इलाज के दौरान तड़के 3.30 बजे निधन हो गया। पीएम मोदी अहमदाबाद के लिए रवाना हो गए हैं।” खास बात यह है कि अब तक मिली जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी का आज का कार्यक्रम रद्द नहीं किया गया है.

हीराबा के निधन पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दुख जताया है. इसके अलावा गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भी हीराबेन मोदी के निधन पर दुख जताया है. उन्होंने ट्वीट कर लिखा है, ‘माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदी की मां पूज्य हीराबा के निधन से बेहद दुखी हूं. दरियादिली, सादगी, मेहनत और जीवन के उच्च मूल्यों की मिसाल थी पूज्य हीराबा। मैं प्रार्थना करता हूं कि भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।

हीराबा कुछ दिनों से बीमार थी

बता दें कि हीराबेन मोदी (100 साल) की तबीयत बुधवार सुबह बिगड़ गई थी। उन्हें तुरंत अहमदाबाद के यूएन मेहता सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी दोपहर में दिल्ली से सीधे अहमदाबाद के यूएन मेहता अस्पताल पहुंचे। वे माताजी के स्वास्थ्य के बारे में पूछताछ करने के लिए यहां डेढ़ घंटे रुके और शाम को उनकी तबीयत में सुधार होने पर दिल्ली लौट आए।

बता दें कि हीराबा ने इसी साल जून में ही अपना 100वां बर्थडे सेलिब्रेट किया था। पीएम मोदी ने उनके 100वें जन्मदिन पर एक खास लेटर भी लिखा था .

हीराबा ने संघर्षों को चुनौती देना जारी रखा

हीराबा का जन्म 18 जून 1923 को पालनपुर में हुआ था। शादी के बाद वह वडनगर शिफ्ट हो गईं। हीराबा की उम्र महज 15-16 साल की थी जब उनकी शादी हुई थी। घर की आर्थिक और पारिवारिक स्थिति खराब होने के कारण उन्हें पढ़ने का अवसर नहीं मिला। लेकिन वह अपने बच्चों को शिक्षित करने के लिए दूसरों के घरों में काम करने को भी तैयार हो गई। फीस भरने के लिए उन्होंने कभी किसी से पैसे उधार नहीं लिए। हीराबा चाहती थी कि उनके सभी बच्चे साक्षर और शिक्षित हों।

शहरी विकास मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि निकाय क्षेत्रो में रैन बसेरे के पर्याप्त इंतजाम किए जाए।