मसूरी : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल कोर्ट द्वारा मसूरी झील के पास धोबीघाट के पानी के व्यवसायिक उपयोग पर रोक लगाने के बाद मसूरी के उपजिलाधिकारी एसडीएम शैलेंद्र नेगी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जल संस्थान, जल निगम, होटल मालिकों व अन्य व्यापारियों सहित सभी विभागों के साथ बैठक कर स्पष्टीकरण दिया. कि किसी भी परिस्थिति में एनजीटी के आदेश का सख्ती से पालन किया जाएगा और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इसके लिए जल संस्थान व पुलिस को इस पर कड़ी नजर रखने के आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सभी प्रभावित पक्ष जल संस्थान से संपर्क कर अन्य स्रोतों से पानी की व्यवस्था कर सकते हैं, लेकिन निजी पानी के टैंकरों का भी उपयोग नहीं करें.

नगर पालिका सभागार में आयोजित बैठक में डिप्टी कलेक्टर शैलेंद्र नेगी ने कहा कि सभी को एनजीटी के आदेश का पालन करना होगा. जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह सभी पक्षों को इस बारे में सूचित करे, ताकि सभी पक्ष एनजीटी के आदेश का पालन कर सकें और प्रशासन कोई कार्रवाई करने को मजबूर न हो, इसलिए गुरुवार को बैठक की गई.

उन्होंने कहा कि कार्तिक शर्मा बनाम उत्तराखंड राज्य मामले में एनजीटी कोर्ट ने मसूरी झील के पानी के व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है. इसके लिए जिलाधिकारी और पीसीबी को फैसले को लागू करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे।

उन्होंने पेयजल निगम को यमुना पेयजल योजना को 30 मार्च तक शीघ्र पूरा करने का प्रयास करने के निर्देश दिए, ताकि मसूरी की जनता को इस समस्या से निजात मिल सके. साथ ही उन्होंने जल संस्थान से अन्य स्रोतों से पानी उपलब्ध कराने को कहा है।

वहीं होटल मालिक परामर्श केंद्र और वर्षा जल संचयन की व्यवस्था करें ताकि पानी की बर्बादी न हो या अपशिष्ट जल को रिसाइकल कर इस्तेमाल किया जा सके. वहीं, जल निकायों को पानी के रिसाव के उपचार के लिए निर्देशित किया गया है, ताकि पानी को बचाया जा सके. साथ ही पुलिस को हिदायत दी कि अगर कोई टैंकर झील से पानी भरता पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

इसकी जानकारी देते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. आर.के. चतुर्वेदी ने कहा कि धोबीघाट के पानी का दुरूपयोग करने की बात कहते हुए एनजीटी में मामला दायर किया गया था. जिस पर कोर्ट ने आदेश दिया कि टैंकरों से पानी भरने पर रोक लगाई जाए और पानी की शुद्धता का निर्धारण किया जाए.

इस संबंध में ट्रेड यूनियन अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने कहा कि एनजीटी के आदेश से शहर के पर्यटन पर बुरा असर पड़ेगा. मसूरी समेत कई शहरों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जाती है, अगर इसे रोका गया तो पर्यटन प्रभावित होगा और बेरोजगारी बढ़ेगी. इस समस्या के समाधान के लिए यमुना योजना को जल्द पूरा करना होगा, अगर यह समय पर नहीं किया गया तो इससे पर्यटन प्रभावित होगा, जिससे पूरे देश में गलत संदेश जाएगा।

जल संस्थान के एलसी रमोला ने इस अवसर पर कहा कि मसूरी में लगभग 14 एमएलडी पानी की आवश्यकता होती है लेकिन वर्तमान में 7.50 एमएलडी पानी ही उपलब्ध है, ऐसे में पानी की कमी को दूर करने के लिए यमुना योजना जल्द शुरू करना जरूरी है.

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