देहरादून : बाइपास निरंकारी सत्संग भवन में हजारों श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया है. हर अनुयायी खुश नजर आया। सेवादल की वर्दी में पुरुषों और महिलाओं की सेवाओं को देखकर ऐसा लग रहा था मानो सरकारी तंत्र उनके सामने बौना हो गया हो। हजारों की भीड़, केवल सेवादल के लोग बड़े शालीनतापूर्वक हाथ जोड़कर हर एक अनुयायी को आगे से आगे बढ़ा रहे थे। इस मिशन में आपसी प्रेम की मिसाल देखने को मिली.

देहरादून शाखा में हमेशा एक दर्जन से अधिक क्षेत्रों में सुबह की सगतें होती हैं। रविवार को जो लोग इकट्ठे हुए थे, वे मनुष्य को इस संसार में जन्म लेने का अर्थ समझा रहे थे। आज इंसान इंसान का दुश्मन बन गया है इंसान जंगली जानवरों से इतना नहीं डरता । इस सत्संग में केवल महिलाएं ही शामिल हो रही थीं। सभा को संबोधित करते हुए साविन्द्र कौर ने कहा कि सद्गुरु हर युग में साकार रूप में प्रकट होते हैं।

यह संपूर्ण मानव जाति को लाभ पहुंचाता है। जिसने इसे जान लिया, उसका जीवन सुखी हो गया, लेकिन जो इसमें फंसा रहा, पीड़ित रहा, उन्होंने कहा कि स्त्री के रूप अनेक है जहां माँ, बहिन ,पत्नी का रोल निभाती है वही कई तरह के अत्याचार भी सहती है ।परिवार की बहुत बड़ी जिम्मेदारी निभाती है ।आज धरती पर स्त्री के रूप में सद्गुरु सुदीक्षा महाराज जी अवतरित हो चुकी है, जो पूरे विश्व में मानव को मानवता का सन्देश दे रही है ।।

जिस समाज में महिलाओं को सिर्फ चार दीवारी में कैद करके रखा गया है, वहां महिलाओं को निरंकारी मिशन में सबसे आगे रखा गया है। गढ़वाली भाषा का सहारा लेते हुए निरंकारी मिशन के ज्ञान प्रचारक इंद्रा नकोटी ने कहा कि आज निरंकारी मिशन के अनुयायी खुले मंच से कह रहे हैं कि ईश्वर के दर्शन होते हैं। हमने देखा है और इसलिए हम सबसे प्यार करते हैं।

वहीं सुशील रावत ,रेखा भट्ट ने ईश्वर की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि इस युग में सद्गुरु भौतिक रूप में अवतरित हुए हैं जो सबको मानवता का पाठ पढ़ा रहे हैं. गढ़वाली, कुमाउनी,नेपाली भाषा में भजनों से भी संगते खूब निहाल हुई।संगत का संचालन शीतल एवं शशी बिष्ट ने बखूबी निभाया।

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